मृत्युंजय बर्मन
SERAIKELA NEWS,
चुनावी जीत की शुरुआत मतदान के दिन नहीं, बल्कि मतदाता सूची से होती है। यदि समर्थकों का नाम मतदाता सूची में ही दर्ज नहीं होगा, तो रैलियों की भीड़ और चुनावी प्रचार भी जीत की गारंटी नहीं बन सकते। यही कारण है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR)-2026 को चुनाव आयोग और प्रशासन लोकतांत्रिक प्रक्रिया की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी मान रहे हैं।
9 जुलाई को गम्हरिया में समीक्षा दौरा में जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि SIR-2026 निर्वाचन प्रक्रिया का अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य है। उन्होंने सभी संबंधित पदाधिकारियों एवं निर्वाचन कर्मियों को पूर्ण संवेदनशीलता, जवाबदेही और समन्वय के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने का निर्देश दिया। यह संदेश केवल प्रशासनिक मशीनरी के लिए ही नहीं, बल्कि उन सभी राजनीतिक दलों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिन्हें बूथ स्तर तक लोकतांत्रिक प्रक्रिया का साझेदार बनाया गया है।
1132 बूथों की जिम्मेदारी, क्या सभी दल पूरी तरह सक्रिय हैं?
सरायकेला-खरसावां जिले के प्रत्येक मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के जिलाध्यक्ष पर ईचागढ़, सरायकेला और खरसावां, तीनों विधानसभा क्षेत्रों की जिम्मेदारी होती है। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार जिले में कुल 1132 प्रस्तावित मतदान केंद्र हैं। इनमें ईचागढ़ में 366, सरायकेला में 466 और खरसावां में 300 मतदान केंद्र शामिल हैं।
इन सभी बूथों के मतदाताओं का सत्यापन, नए पात्र मतदाताओं का पंजीकरण, त्रुटियों का सुधार और आवश्यक दावे-आपत्तियों में सहयोग करना केवल प्रशासन का काम नहीं है। चुनाव आयोग ने इसी उद्देश्य से राजनीतिक दलों को BLA नियुक्त करने की व्यवस्था दी है, ताकि बूथ स्तर पर मतदाता सूची अधिक से अधिक शुद्ध और अद्यतन हो सके।
कम साक्षरता वाले जिले में चुनौती और बड़ी
2011 की जनगणना के अनुसार सरायकेला-खरसावां जिले की साक्षरता दर लगभग 67.7 प्रतिशत है। ऐसे जिले में बड़ी संख्या में मतदाता ऐसे हो सकते हैं जिन्हें SIR की प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेजों या समय-सीमा की पूरी जानकारी नहीं हो। इसलिए गांव-गांव और टोला-टोला तक जागरूकता पहुंचाना केवल सरकारी कर्मचारियों पर छोड़ देना पर्याप्त नहीं माना जा सकता।
झामुमो जिलाध्यक्ष डॉ. शुभेन्दु महतो ने बताया कि उनकी पार्टी ने सभी बूथों पर BLA की प्रतिनियुक्ति कर दी है तथा उसकी सूची जिला निर्वाचन पदाधिकारी को उपलब्ध करा दी गई है। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेती-बाड़ी के मौसम और लगातार वर्षा के कारण अभियान को अपेक्षित गति नहीं मिल सकी है। वहीं, सरायकेला से लौटने के क्रम में झामुमो नेता केपी सोरेन ने बताया कि गत 3 जून को पार्टी के महासचिव विनोद पांडे और सांसद जोबा माझी एवं विधायकों की मौजूदगी में SIR को लेकर पार्टी के दिशा निर्देशों का अनुपालन किया जा रहा है। दूसरे राजनीतिक दलों की अपेक्षा झामुमो की सक्रियता संतोषप्रद है, लेकिन केवल BLA की नियुक्ति पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि उनकी नियमित मॉनिटरिंग, बूथवार समीक्षा और फील्ड में सक्रियता पर हमलोग विशेष ध्यान दे रहे हैं।
अन्य दलों के सामने भी वही चुनौती
यदि किसी राजनीतिक दल ने अपने सभी बूथों पर BLA नियुक्त नहीं किए हैं, या नियुक्त BLA सक्रिय नहीं हैं, तो चुनाव के समय उसके समर्थकों के नाम मतदाता सूची से छूटने का जोखिम बढ़ सकता है। ऐसे में राजनीतिक दलों को यह भी आत्ममंथन करना होगा कि चुनावी तैयारियों की शुरुआत केवल रैली और जनसभा से नहीं, बल्कि मतदाता सूची की शुद्धता से होती है।
मतदाता ही लोकतंत्र की फसल हैं
ग्रामीण समाज की एक कहावत है, “धान की अच्छी फसल चाहिए तो समय पर बिचड़ा लगाना पड़ता है।” लोकतंत्र में भी यही सिद्धांत लागू होता है।
मतदाता ही चुनाव की असली फसल हैं। यदि आज राजनीतिक दल मतदाता सूची के पुनरीक्षण में पूरी गंभीरता नहीं दिखाएंगे, तो चुनाव के दिन समर्थन होने के बावजूद वोट में उसका पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा।
SIR इसलिए केवल प्रशासनिक अभियान नहीं, बल्कि लोकतंत्र की बुनियाद को मजबूत करने का साझा दायित्व है। आने वाले 18 दिन प्रशासन, राजनीतिक दलों और समाज, तीनों की सक्रियता की असली परीक्षा होंगे।