
सरायकेला। सड़क दुर्घटनाओं में अक्सर ‘गोल्डन ऑवर’ यानी शुरुआती कुछ मिनट ही जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर तय करते हैं। सरायकेला-खरसावां जिले में इसका एक जीता-जागता और प्रेरणादायी उदाहरण देखने को मिला है। गम्हरिया थाने में पदस्थापित पुलिस आरक्षी (कांस्टेबल) रविंद्र नाथ लोहारा एक भीषण सड़क हादसे का शिकार हो गए थे। लेकिन दो चीजों ने उनकी जान बचा ली— पहला, सिर पर लगा हेलमेट और दूसरा, उसी रास्ते से गुजर रहे अपर उपायुक्त (ADC) जयवर्धन कुमार की तत्परता। मौत के मुंह से वापस लौटे जवान ने अब आम लोगों के लिए एक मार्मिक और जरूरी संदेश जारी किया है।

रात 1 बजे सुनसान सड़क पर हुआ था हादसा
घटना राजकीय चैत्र पर्व सह छऊ महोत्सव-2026 के दौरान की है। कांस्टेबल रविंद्र नाथ लोहारा अपनी नाइट ड्यूटी खत्म कर रात करीब 1:00 बजे बाइक से वापस लौट रहे थे। तभी सुनसान रास्ते में एक अज्ञात वाहन ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। वे गंभीर रूप से घायल होकर सड़क किनारे गिर पड़े। संयोग से उसी वक्त अपर उपायुक्त जयवर्धन कुमार अपनी गाड़ी से वहां से गुजर रहे थे। सड़क किनारे लहूलुहान जवान को देखते ही उन्होंने बिना एक पल गंवाए उसे अपनी गाड़ी में उठाया और तुरंत गम्हरिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। वहां से प्राथमिक उपचार के बाद जवान को जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल रेफर कर दिया गया।
10 दिन तक ICU में रहे, कहा- ‘हेलमेट न होता तो नहीं बचता’
गंभीर चोटों के कारण रविंद्र नाथ लगभग 10 दिनों तक आईसीयू (ICU) में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ते रहे। अब पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद जब वह समाहरणालय में एडीसी जयवर्धन कुमार से शिष्टाचार भेंट करने पहुंचे, तो उनकी आंखें भर आईं। रविंद्र ने कहा, “अगर उस रात मैंने हेलमेट नहीं पहना होता, तो सिर के परखच्चे उड़ जाते। हेलमेट की वजह से सिर बच गया और एडीसी सर ने सही समय पर अस्पताल पहुंचा दिया, इसलिए आज जिंदा आपके सामने खड़ा हूं।” उन्होंने युवाओं से अपील की कि टू-व्हीलर चलाते समय हेलमेट और फोर-व्हीलर में सीट बेल्ट जरूर लगाएं, नशे में गाड़ी न चलाएं।
घायलों की मदद करने वाले ‘गुड सेमेरिटन’ होंगे सम्मानित
इस घटना ने पूरे प्रशासनिक अमले को एक नई ऊर्जा दी है। उपायुक्त नितिश कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक निधि द्विवेदी ने जवान के जज्बे और एडीसी की संवेदनशीलता की जमकर सराहना की। उपायुक्त नितिश कुमार सिंह ने कहा कि सड़क सुरक्षा सिर्फ पुलिस का काम नहीं है, यह एक सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जिले में जो भी नागरिक सड़क हादसों में घायलों की मदद कर उन्हें अस्पताल पहुंचाएंगे (Good Samaritans), उनकी पहचान कर उन्हें जिला स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। एसपी निधि द्विवेदी ने भी आम जनता से अपील की कि पुलिस या कोर्ट-कचहरी के डर से घायलों को सड़क पर तड़पता न छोड़ें, बेझिझक मदद के लिए आगे आएं; पुलिस आपका पूरा सहयोग करेगी।

