
एनडीआरएफ (NDRF) ने सिखाए आपदा प्रबंधन के व्यावहारिक गुण
जमशेदपुर में सिविल डिफेंस द्वारा 15 जून से 19 जून तक आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण शिविर शुक्रवार को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। इस कैंप में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीम ने सिविल डिफेंस के वॉलंटियर्स को आपदा प्रबंधन से संबंधित जीवन रक्षक तकनीकें और बारीकियां सिखाईं। समापन समारोह में नागरिक सुरक्षा जमशेदपुर के उप नियंत्रक सह धालभूम अनुमंडल पदाधिकारी अर्णव मिश्रा, NDRF के डीसी विनय कुमार, सिविल डिफेंस के चीफ वार्डन अरुण कुमार, प्रधान सहायक सुरेश प्रसाद, के के सिन्हा, रोहित कुमार और दया शंकर मिश्रा सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

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गोताखोरी, जल बचाव और आत्मरक्षा पर विशेष फोकस
NDRF की टीम द्वारा इस पांच दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के दौरान स्वयंसेवकों को गोताखोरी, जल बचाव अभियान, आत्मरक्षा और आपदा के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों की व्यावहारिक सीख दी गई। यह प्रशिक्षण केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में खुद को सुरक्षित रखते हुए दूसरों की जान बचाने का एक व्यापक अभियान था। प्रशिक्षकों ने विभिन्न तकनीकों का लाइव प्रदर्शन कर स्वयंसेवकों को बताया कि प्राकृतिक या मानवजनित आपदाओं के दौरान धैर्य, साहस और कौशल का समन्वय कितना आवश्यक है।
आपदा में बचावकर्ता की सुरक्षा सर्वोपरि मॉक ड्रिल से मिला व्यावहारिक ज्ञान
समापन के मौके पर अधिकारियों ने कहा कि बाढ़, डूबने की घटनाएं और सड़क दुर्घटनाएं अचानक सामने आती हैं। ऐसे समय में प्रशिक्षित स्वयंसेवक प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण सहयोगी साबित होते हैं। ट्रेनिंग में इस बात पर जोर दिया गया कि किसी भी आपदा में बचावकर्ता की सुरक्षा सर्वोपरि होती है। यदि स्वयंसेवक ही असुरक्षित हो जाए तो राहत कार्य प्रभावित हो सकता है। इसी सोच के तहत वॉलंटियर्स को आधुनिक बचाव तकनीकों से लैस किया गया और काल्पनिक आपदा परिस्थितियां तैयार कर व्यावहारिक अभ्यास (मॉक ड्रिल) भी कराई गई।
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स्थानीय सहभागिता से मजबूत होगा आपदा प्रबंधन, 72 प्रतिभागियों को मिला सर्टिफिकेट
विशेषज्ञों और उपस्थित अधिकारियों का मानना है कि देश में बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं को देखते हुए सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। जब स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित स्वयंसेवक उपलब्ध होते हैं, तो राहत कार्य अधिक तेज और प्रभावी हो जाता है। NDRF की टीम ने स्पष्ट किया कि वास्तविक आपदा के समय केवल सैद्धांतिक ज्ञान पर्याप्त नहीं होता, बल्कि बार-बार किया गया अभ्यास ही प्रभावी बनाता है। इस प्रशिक्षण शिविर में कुल 72 प्रतिभागी शामिल हुए थे, जिन्हें अंतिम दिन मुख्य अतिथियों के हाथों प्रमाण पत्र प्रदान किया गया।


