
जमशेदपुर: जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने पुरानी और नई पीढ़ी के बीच सोच के अंतर को स्वाभाविक बताते हुए कहा है कि नई पीढ़ी पर शंका करने की नहीं, बल्कि उस पर विश्वास करने की आवश्यकता है। वह सोनारी में छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक समिति की ओर से आयोजित ‘श्री श्री श्रावणी रामायण पाठ’ के समापन समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।


नई सोच और पीढ़ी के अंतर पर विचार
सरयू राय ने कहा कि नई पीढ़ी बदलती परिस्थितियों और आधुनिक तकनीक के दौर में बड़ी हो रही है, इसलिए उसका सोचने और काम करने का तरीका पुरानी पीढ़ी से अलग होना स्वाभाविक है। पुरानी पीढ़ी अक्सर यह मान लेती है कि नई पीढ़ी उतना नहीं कर पाएगी जितना उसने किया है, जो कि एक गलत सोच है। पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा इंदिरा गांधी को लिखे पत्र का हवाला देते हुए उन्होंने समझाया कि नई पीढ़ी अलग समय और परिस्थितियों में जन्म लेती है, इसलिए उनकी सोच को केवल इसलिए गलत नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि वह पुरानी सोच से भिन्न है। अनुभव और नई सोच का समन्वय ही समाज को आगे ले जा सकता है।
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तकनीक को मालिक नहीं, सेवक बनाएं
मोबाइल फोन और आधुनिक तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि सवाल यह नहीं है कि युवा मोबाइल का उपयोग करते हैं या नहीं, बल्कि यह है कि वे इसका उपयोग किस उद्देश्य के लिए कर रहे हैं। यदि नौजवान ज्ञान, शिक्षा और रोजगार की जानकारी हासिल करते हैं तो उनका कल्याण तय है।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “टेक्नोलॉजी को मालिक बनाइएगा तो बर्बाद हो जाइएगा। टेक्नोलॉजी को सेवक के रूप में रखेंगे तो कल्याण हो जाएगा।” रामायण पाठ का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि कैसे पहले आवाज सीमित लोगों तक पहुंचती थी, लेकिन तकनीक और लाउडस्पीकर के आने से यह दायरा बढ़ा और आज इंटरनेट व मोबाइल के जरिए इसका सीधा प्रसारण दुनिया के किसी भी कोने तक पहुंच रहा है। उन्होंने अंत में कहा कि पुरानी पीढ़ी को अविश्वास का भाव छोड़ना होगा, क्योंकि नई पीढ़ी निश्चित रूप से बेहतर कार्य करेगी।
मुख्य बिंदु
आयोजन: छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक समिति द्वारा सोनारी में श्रावणी रामायण पाठ का समापन।
मुख्य वक्ता: जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय।
प्रमुख संदेश: नई पीढ़ी पर भरोसा रखें और तकनीक को मालिक नहीं बल्कि सेवक बनाएं।
तकनीक का महत्व: मोबाइल और इंटरनेट के सकारात्मक इस्तेमाल पर जोर।


