
मामले के उद्भेदन बाद एसडीओ ने दिया कार्रवाई का निर्देश
सिमरी बख्तियारपुर,सहरसा से ब्रजेश भारती की रिपोर्ट ।
प्रखंड क्षेत्र में इंदिरा आवास योजना में समय समय पर फर्जीवाड़ा होने का मामला सामने आता रहा है कार्यवाही भी होती है लेकिन यह मामला रूकने का और सामने आने नही थम रहा है ।
ताजा मामला प्रखंड के सरडीहा पंचायत से सामने आया है यहां के एक लाभुक को पहले पति के नाम वर्ष 2008-09 में लाभ दिया गया फिर उनके 8 साल बाद पत्नी के नाम से इंद्रा आवास की स्वीकृति कर दिया गया। हलांकि मामले का परिवार दायर करने के बाद पत्नी के खाते को सील कर इस मामले की जांच की गई जिसमें फर्जीवाड़ा की बात सामने आई है। जिसपर एसडीओ सुमन प्रसाद साह ने बीडीओ को दोषी इंद्रा आवास सहायक सहित अन्य पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
इस फर्जीवाड़ा का खुलासा सरडीहा गांव के वार्ड नं 09 निवासी सुधीर सिंह ने लिखित शिकायत पत्र दायर कर किया था जो जांच में सत्य पाया गया।
जांच में मामला सत्य पाये जाने पर एसडीओ सुमन प्रसाद साह ने सिमरी बख्तियारपुर बीडीओ को निर्देशित करते हुये कहा कि सरडीहा गांव निवासी पवन कुमार सिंह पिता प्रमोद नारायण सिंह को वर्ष 2008-09 इंदिरा आवास योजना का लाभ के रूप में 24 हजार रुपया सरकारी राशि दी गई थी उसके बाद पुनः पवन सिंह की पत्नी पूजा देवी को इंदिरा आवास सहायक गौतम कुमार ने 28 दिसंबर 15 को उसके बैंक खाते में इंदिरा आवास की राशि 35 हजार भेजा। लेकिन पूजा देवी 7 दिसंबर 16 तक उस राशि को घर बनाने के लिये उपयोग में नही लाई।ऐसे में दोषी इंदिरा आवास सहायक व लाभुक पर विधि सम्वत कार्यवाही की जाय।
जांच में हुआ सुलासा-
अवर निर्वाचन पदाधिकारी पवन कुमार ने इस मामले की जांच की जांच कर रिपोर्ट एसडीओ को समर्पित किया था जिसमें कहा गया था कि जब इस मामले में इंदिरा आवास सहायक से पूछताछ किया गया तो इंदिरा आवास सहायक ने बताया था कि ये पवन सिंह दूसरा व्यक्ति है। जिनको लाभ नहीं मिला है। लेकिन जब उस पवन सिंह के बारे में कागजात की जांच कर जानकारी लिया गया तो इंद्रा आवास सहायक की बात झूट निकली। इससे स्पष्ट होता है कि इंदिरा आवास सहायक जान बुझकर एक परिवार को दो बार लाभ पहुंचाने की नियत से ऐसा फर्जीवाड़ा किया था । हलांकि जाँच अधिकारी ने लाभुक पूजा देवी की केनरा बैंक की खाता को जांच के क्रम मैं ही फ़्रिज कर दिया जिसकी वजह से राशि की निकाली नही हो पाई थी।
यह मामला सामने आने के बाद कई लोगो का कहना है कि इस तरह के दर्जनों मामले है जब एक ही लाभुक को दो दो क्या तीन तीन बार लाभ गलत तरीके से मिला है ऐसे मामले सबसे ज्यादा तटबंध के अंदर का है।


