
जमशेदपुर।

शहर और इसके आसपास के मंदिरों में सुबह-सुबह आस्था के प्रतीक के रूप में चढ़ाए जाने वाले फूल दोपहर तक कचरे में तब्दील हो जाते थे। लेकिन अब यही फूल कचरा नहीं रहे, बल्कि ग्रामीण और शहरी परिवेश की महिलाओं के लिए एक नई जिंदगी और रोजगार का आधार बन गए हैं। टाटा स्टील फाउंडेशन के सहयोग से स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ीं 30 महिलाएं इन फेंके गए फूलों से खुशबूदार और सजावटी धूप (Dhoop cones) बना रही हैं, जिससे वे आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही हैं।
खुशबू और पिंकी जैसी महिलाओं को मिली नई पहचान
एक समय था जब खुशबू केवल घर की चारदीवारी और घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित थीं। आज वह इस एसएचजी की सचिव की भूमिका निभा रही हैं। उनका कहना है, “मैंने कभी नहीं सोचा था कि मंदिरों के फूल हमारी कमाई का जरिया बन सकते हैं। आज इस काम की बदौलत मैं अपने परिवार का खर्च उठा रही हूं। यह कमाई से ज्यादा मुझे आत्मविश्वास और खुशी देता है।” इसी तरह टीम की एक अन्य सदस्य पिंकी कैशियर के रूप में वित्तीय रिकॉर्ड संभालती हैं। पिंकी मानती हैं कि इस पहल ने उन्हें पर्यावरण को बचाने के साथ-साथ परिवार की मदद करने का भी अनमोल मौका दिया है। जो महिलाएं पहले सिर्फ घर का काम करती थीं, वे आज उद्यमी (Entrepreneur) बनकर प्रोडक्शन, इन्वेंट्री और बाजार के काम संभाल रही हैं।
शहर के इन प्रसिद्ध मंदिरों से आते हैं फूल
यह महिलाओं का समूह सोनारी के राम मंदिर और मौनी बाबा मंदिर, साकची के मनोकामना मंदिर, टिनप्लेट काली मंदिर, बेल्डीह कालीबाड़ी, जादूगोड़ा के रंकिणी मंदिर, पोटका के हरिणा मंदिर और गालूडीह के वैष्णो देवी मंदिर जैसे कई मंदिरों से फूलों को इकट्ठा करता है। इकट्ठा करने के बाद इन फूलों को अलग-अलग छांटा जाता है, सुखाया जाता है और फिर प्रोसेसिंग के जरिए बाजार में बिकने वाले शानदार उत्पादों में बदल दिया जाता है।
5.5 टन कचरे की हुई रिसाइकिलिंग, अच्छी आमदनी
यह पहल सिर्फ महिलाओं को रोजगार ही नहीं दे रही, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और कचरा प्रबंधन में भी एक बहुत बड़ी भूमिका निभा रही है। अब तक 5.5 टन से अधिक मंदिरों के फूल-कचरे को रिसाइकिल किया जा चुका है, जिससे 61,000 रुपये से अधिक के उत्पादों की बिक्री हुई है। हालांकि, इस प्रयास का असली मूल्य केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि महिलाओं की आंखों में चमकते आत्मविश्वास और उनके बच्चों के बेहतर भविष्य में देखा जा सकता है।
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बागुनहातु स्किल सेंटर में मिल रही नई उड़ान
इस बढ़ते हुए अभियान को और अधिक मजबूती देने के लिए बागुनहातु कौशल केंद्र (Skill Centre) में एक समर्पित उत्पादन और प्रशिक्षण सुविधा विकसित की जा रही है। यहां महिलाओं को स्किल डेवलपमेंट, इन्वेंट्री मैनेजमेंट और नए उत्पादों के निर्माण की ट्रेनिंग मिलेगी, जिससे वे अपने काम को और बड़े पैमाने पर फैला सकेंगी। कल सुबह जब फिर मंदिरों की घंटियां बजेंगी, तो पूर्वी सिंहभूम की इन महिलाओं के लिए वे फेंके गए फूल सिर्फ कचरा नहीं, बल्कि उम्मीद और स्वाभिमान का एक नया अध्याय लेकर आएंगे।



