सहरसा-चिड़ैया ओपी-नाम बड़े और दर्शन छोटे अपराधी घोड़े से और पैदल चलता है पुलिस

 

ब्रजेश भारती
सिमरी बख्तियारपुर(सहरसा)  ।
सहरसा-खगड़िया सीमा पर स्थित पूर्वी कोसी तटबंध के अंदर अपराधियों पर नकेल कसने के लिए स्थापित सलखुआ प्रखंड अंतर्गत चिड़ैया ओपी लगभग पिछले 22 वर्षो से और बख्तियारपुर थाना अंतर्गत बेलवारा पंचायत मे स्थित कनरिया ओपी पिछले 27 सालों से जर्जर विद्यालय भवन मे ही संचालित हो रहा है.जबकि सरकार का स्पष्ट आदेश हैं की विद्यालय भवन मे ओपी या थाना नही चलना चाहिए.इसके बावजूद स्थापना के इतने वर्षो बाद भी दोनों ओपी मे भवन से लेकर कई संसाधनों का घोर अभाव है.जमीन-भवन नही रहने से दोनों ओपी मे कार्यरत लोगो को काफी परेशानी होती है वही वर्दीधारी जवानों को देख बच्चे डर जाते है.इसके साथ साथ ओपी को अब तक जीप उपलब्ध नही हो पाई है और जिस वजह से अपराधियों की धड़-पकड़ पैदल ही करनी पडती है.अपराध की भूमि के रूप मे चर्चित दियारा के ग्रामीण कहते है कि जिला प्रशासन दो जिलो के मुख्य दियारा इलाके को देखते हुए जल्द-से-जल्द ओपी को जीप उपलब्ध करवाए जिससे दियारा मे हमेशा शांति रह सके.ज्ञात हो की कोसी दियारा क्षेत्र के फरकिया के नाम से मशहूर चिड़ैया ओपी का इलाका वर्षो से अपराधियों और नक्सलियों का गढ़ माना गया है.बताया जाता है की 1994 मे खगड़िया जिले के अलौली प्रखंड के बरियाही गाँव से भगाई गई नील गाय को चिडैया ओपी के वासियों ने पकड़ लिया.नील गाय को लेकर बरियाही और चिड़ैया के बीच विवाद उत्पन्न हो गया और नौबत मारपीट तक पहुँच गई थी.इसी विवाद के आलोक मे कईयो पर कार्यवाई हुई और तात्कालीन  सहरसा के पुलिस अधीक्षक के आदेश पर पुलिस कैम्प बनाया गया जो वर्तमान स्वरूप मे चिडैया ओपी के नाम से चर्चित है.जानकर बताते है की चिडैया 1994 से और कनरिया ओपी 1986 से ही विद्यालय भवन मे चल रहे है और आजतक इस चीज की सुध किसी अधिकारी ने नही ली।

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