
झारखंड में पारंपरिक ग्राम व्यवस्था को मजबूत करने और ग्रामीणों को उनका हक दिलाने के लिए राज्य सरकार ने 25 साल के लंबे इंतजार के बाद पेसा (PESA) कानून लागू कर दिया है। धुर्वा स्थित प्रोजेक्ट भवन के एनेक्सी सभागार में आयोजित एक राज्यस्तरीय कार्यशाला के दौरान ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पाण्डेय सिंह ने इसके बेहतर और मजबूत क्रियान्वयन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पेसा नियमावली के दायरे में आने वाले जिलों के अधिकारियों को इसके लिए अपनी पूरी जिम्मेदारी निभानी होगी।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का सपना होगा सच
READ MORE..JAMSHEDPUR NEWS: 8 साल के आदित्य राज ने मॉडलिंग में लहराया परचम, विधायक सरयू राय ने बढ़ाया हौसला
कार्यशाला को संबोधित करते हुए मंत्री दीपिका पाण्डेय सिंह ने कहा कि यह ऐतिहासिक कानून मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के दिशा-निर्देश पर लागू किया गया है। मुख्यमंत्री का सपना था कि राज्य में पारंपरिक ग्राम व्यवस्थाओं को प्राथमिकता मिले और ग्रामीण सशक्त बनें। दीपिका पाण्डेय सिंह ने बताया कि देश के 10 राज्यों में PESA कानून लागू होना था, जिनमें से झारखंड का कानून सबसे बेहतर और प्रभावी माना जा रहा है।
3 महीने के भीतर ग्राम प्रधानों की होगी नियुक्ति
मंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया कि पारंपरिक व्यवस्था के तहत तीन महीने के भीतर ग्राम प्रधानों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि आगे की व्यवस्थाएं सुचारू रूप से लागू की जा सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि पारंपरिक ग्राम प्रधान और राजस्व ग्राम प्रधान के अंतर को समझने की जरूरत है और पारंपरिक तरीके से ही ग्राम सभा के जरिए ग्राम प्रधान का चयन सुनिश्चित किया जाएगा।
क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद और 125 मास्टर ट्रेनर तैयार
READ MORE..JAMSHEDPUR NEWS: पंजाब नेशनल बैंक ने लगाया नोट और सिक्का विनिमय मेला, ग्राहकों में दिखा भारी उत्साह
पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार ने कार्यशाला में बताया कि PESA नियमावली को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए इसका क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद कराया गया है। इसके अलावा, राज्यभर में जागरूकता बढ़ाने के लिए 125 मास्टर ट्रेनरों को तैयार किया गया है। नियमों के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं के अध्ययन के लिए निदेशक की अध्यक्षता में एक विशेष कमेटी का भी गठन किया गया है।
बाधाओं को दूर करने के लिए तकनीकी सत्र का आयोजन
पंचायती राज निदेशालय की निदेशक बी. राजेश्वरी ने अपने स्वागत संबोधन में इसे एक ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि कानून के क्रियान्वयन के दौरान आने वाली चुनौतियों और बाधाओं को दूर करने के लिए निरंतर सुधार किए जा रहे हैं। कार्यशाला में आयोजित तीन तकनीकी सत्रों में परंपरागत ग्रामसभा की भूमिका, सामुदायिक भागीदारी और प्रशासनिक जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस बैठक में विभिन्न जिलों के उप समाहर्ता, प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) और अंचलाधिकारी (CO) मुख्य रूप से उपस्थित थे।



