रांची।
झारखंड की राजधानी रांची में शास्त्रीय नृत्य और कला प्रेमियों के लिए एक बेहद शानदार और सुनहरा अवसर सामने आया है। शहर के प्रतिष्ठित मैकॉन इस्पात क्लब (MECON Ispat Club) में ‘नृत्यशाला’ नामक अग्रणी कला संस्था के बैनर तले ‘प्रत्याशा’ (Pratyasha) नाम से एक भव्य कथक नृत्य कार्यशाला (Kathak Workshop) का आयोजन किया जा रहा है। 10 अप्रैल से 12 अप्रैल 2026 तक चलने वाले इस तीन दिवसीय विशेष आयोजन में देश के जाने-माने कथक नर्तक और मशहूर कोरियोग्राफर गुरु संदीप मल्लिक (Sandeep Mallick) विशेष रूप से रांची पधार रहे हैं। इस कार्यशाला के माध्यम से वे शहर के उभरते और स्थापित कलाकारों को कथक के अनछुए गुण और इस प्राचीन शास्त्रीय नृत्य शैली की तकनीकी बारीकियां सिखाएंगे।
150 से अधिक कथक कलाकारों ने कराया पंजीकरण, भारी उत्साह
आयोजक संस्था ‘नृत्यशाला’ की संस्थापक मोनिका डे ने इस भव्य कार्यशाला की रूपरेखा के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि कला प्रेमियों और युवाओं में इस आयोजन को लेकर गजब का उत्साह देखा जा रहा है। उन्होंने बताया कि अब तक 150 से अधिक कथक कलाकारों, प्रशिक्षुओं और नृत्य प्रेमियों ने इस प्रतिष्ठित कार्यशाला में शामिल होने के लिए अपना पंजीकरण (Registration) करा लिया है। मोनिका डे के अनुसार, पंजीकरण की प्रक्रिया अभी भी सुचारू रूप से जारी है और हर रोज बड़ी संख्या में ऐसे लोग जुड़ रहे हैं जिनकी कथक में गहरी रुचि है। यह भारी भीड़ कला और संस्कृति के प्रति रांची वासियों के अगाध प्रेम को दर्शाती है।
‘परिचय’ और ‘गहराई’: अनुभव के आधार पर दो विशेष सत्रों का आयोजन
कथक गुरु संदीप मल्लिक द्वारा दी जाने वाली इस सघन ट्रेनिंग को प्रतिभागियों के पूर्व अनुभव और नृत्य कौशल के आधार पर दो अलग-अलग और विशेष श्रेणियों में बांटा गया है, ताकि हर किसी को इसका पूरा लाभ मिल सके। मोनिका डे ने बताया कि कथक की दुनिया में अपना पहला कदम रखने वाले नए छात्र-छात्राओं और नौसिखियों के लिए ‘परिचय’ (Parichay) नाम से एक अलग कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा, जहां उन्हें नृत्य के बुनियादी कदम (Basics), हस्त मुद्राएं और ताल की प्रारंभिक जानकारी दी जाएगी।
वहीं, दूसरी ओर जो कलाकार पहले से प्रशिक्षित हैं और कथक के जानकार हैं, उनके लिए ‘गहराई’ (Gehrai) नाम से एक एडवांस लेवल के सत्र का आयोजन होगा। इस सत्र में भाव-भंगिमा, कठिन तत्कार, चक्कर और नृत्य की सूक्ष्म तकनीकी बारीकियों का गहन अभ्यास कराया जाएगा।
12 अप्रैल को होगा समापन, प्रतिभागियों को मिलेगा प्रमाण पत्र
शास्त्रीय नृत्य को समर्पित यह तीन दिवसीय सांस्कृतिक और शैक्षणिक अनुष्ठान 12 अप्रैल 2026 को संपन्न होगा। कार्यशाला के आखिरी दिन एक विशेष समापन समारोह का आयोजन किया जाएगा। आयोजकों ने बताया कि इस दौरान ‘परिचय’ और ‘गहराई’ दोनों कार्यशालाओं में सफलता पूर्वक हिस्सा लेने वाले सभी प्रतिभागियों को उनके समर्पण और कला के प्रति प्रेम को प्रोत्साहित करने के लिए संस्था की ओर से ‘भागीदारी प्रमाण पत्र’ (Certificate of Participation) देकर सम्मानित किया जाएगा। यह कार्यशाला रांची के सांस्कृतिक परिदृश्य में एक मील का पत्थर साबित होने जा रही है।




