जमशेदपुर।
सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की जान बचाने के लिए समय पर सहायता मिलना बेहद जरूरी है। दुर्घटना के बाद शुरुआती कुछ मिनटों में सही कदम उठाए जाएं तो गंभीर परिणामों को कम किया जा सकता है। ऐसे समय में घटनास्थल पर मौजूद लोगों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।यह बात राष्ट्रपति सम्मानित सिविल डिफेंस इंस्पेक्टर संतोष कुमार ने एमडीडीटीआई (MDDTI) में आयोजित सड़क सुरक्षा जागरूकता एवं आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कही।
कार्यक्रम में रेलवे के विभिन्न विभागों के 70 रेलकर्मियों को सड़क सुरक्षा, प्राथमिक उपचार, सीपीआर, गोल्डन ऑवर और आपातकालीन बचाव कार्यों का प्रशिक्षण दिया गया।
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सड़क दुर्घटना के बाद शुरुआती मिनट क्यों हैं महत्वपूर्ण?
संतोष कुमार ने कहा कि सड़क दुर्घटना केवल घायल व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि उसके पूरे परिवार और समाज को प्रभावित करती है।उन्होंने बताया कि तेज रफ्तार, वाहन चलाते समय मोबाइल का इस्तेमाल, नशे में ड्राइविंग, नींद या थकान की स्थिति में वाहन चलाना और यातायात नियमों की अनदेखी दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण हैं।इसके अलावा हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग नहीं करना, खराब मौसम तथा सड़कों की खराब स्थिति भी जोखिम बढ़ाते हैं।उन्होंने रेलकर्मियों को बताया कि दुर्घटना के बाद सबसे पहले घटनास्थल की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए और तत्काल आपातकालीन सहायता बुलानी चाहिए।
गोल्डन ऑवर में सही प्राथमिक उपचार बचा सकता है जान
प्रशिक्षण के दौरान गोल्डन ऑवर के महत्व पर विशेष जोर दिया गया।संतोष कुमार ने बताया कि घायल की स्थिति का आकलन करना, गंभीर रक्तस्राव को नियंत्रित करना और समय पर एम्बुलेंस की व्यवस्था करना महत्वपूर्ण है।जरूरत पड़ने पर प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा सीपीआर दिया जा सकता है। हालांकि, सिर या रीढ़ की हड्डी में चोट की आशंका होने पर घायल को अनावश्यक रूप से हिलाने या खींचने से बचना चाहिए।उन्होंने ट्राइएज की भी जानकारी दी, जिसके तहत एक से अधिक घायलों की स्थिति के अनुसार उपचार की प्राथमिकता तय की जाती है।
गुड समैरिटन कानून: मदद करने वालों को मिलता है संरक्षण
संतोष कुमार ने कहा कि कई लोग पुलिस कार्रवाई, अस्पताल की प्रक्रिया और कानूनी परेशानियों के डर से सड़क दुर्घटना में घायलों की मदद करने से पीछे हट जाते हैं।उन्होंने बताया कि स्वेच्छा से सहायता करने वाले नेक मददगारों (Good Samaritans) को मोटर वाहन अधिनियम की धारा 134ए और संबंधित नियमों के तहत कानूनी संरक्षण प्राप्त है।नेक मददगारों को सामान्यतः अपनी व्यक्तिगत जानकारी देने या गवाह बनने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। वे अपनी इच्छा से गवाही दे सकते हैं।उन्होंने बताया कि घायल को अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति पर केवल सहायता करने के कारण इलाज का खर्च उठाने की जिम्मेदारी नहीं होती।
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राहवीर योजना और कैशलेस उपचार की जानकारी
प्रशिक्षण में सड़क दुर्घटना पीड़ितों की मदद करने वाले नागरिकों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से संचालित राहवीर योजना की भी जानकारी दी गई।संतोष कुमार ने बताया कि निर्धारित पात्रता और प्रक्रिया के अनुसार नेक मददगारों को प्रोत्साहन राशि तथा प्रशस्ति पत्र प्रदान किए जाने का प्रावधान है।उन्होंने सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए उपलब्ध कैशलेस उपचार व्यवस्था के बारे में भी बताया। इस सुविधा का लाभ संबंधित सरकारी योजना की शर्तों और पात्रता के अनुसार मिलता है।
मॉक ड्रिल में सीपीआर, बैंडेज और फायर एक्सटिंग्विशर का प्रदर्शन
कार्यक्रम में डेमोंस्ट्रेटर अनिल कुमार सिंह ने सीपीआर, प्राथमिक चिकित्सा, बैंडेज लगाने, फ्रैक्चर की स्थिति में प्रभावित अंग को स्थिर करने और फायर एक्सटिंग्विशर के सही इस्तेमाल का व्यावहारिक प्रदर्शन किया।मॉक ड्रिल के माध्यम से रेलकर्मियों को आपातकालीन परिस्थितियों में सुरक्षित और त्वरित कार्रवाई करने के तरीके सिखाए गए।प्रशिक्षण में कैरेज एंड वैगन, इंजीनियरिंग, ऑपरेटिंग, कमर्शियल और लोको शेड विभागों के कुल 70 रेलकर्मी शामिल हुए।
रेल सिविल डिफेंस टीम को प्रशस्ति पत्र देकर किया सम्मानित
एमडीडीटीआई के प्रिंसिपल ने विभिन्न विषयों पर गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के लिए रेल सिविल डिफेंस टीम की सराहना की।उन्होंने टीम को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।


