
राजेस तिवारी
पटना |
बिहार में लावारिस लाशो का धंधा होता है ,ऐसी लाशो के मांस नोचकर हड्डियों का सौदा किया जाता है | सूत्रों बताते है की सूबे के मेडिकल
कॉलेज अस्पतालों के स्टूडेंट्स इन नरकंकालों के मुख्य ग्राहक है ऐसा ही एक मामला मुजफ्फरपुर के श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज एड हॉस्पिटल (एस के एम सी एच )में उजागर हुआ है | तिरहुत प्रमंडल के आयुक्त अतुल प्रसाद ने मामले की जाच के आदेश दिए है | बताया जाता है की मेडिकल कॉलेज अस्पतालों के सफाईकर्मी अंतिम संस्कार के लिए रखी लावारिश लाशो से कंकाल निकालकर बेचेते है | कहने को तो लाशो की अत्येष्टि के लिए कमेटी है ,पर ये लाशें मोचरी से सफाईकर्मियों के हाथ में ,फिर वहाँ से कंकाल में तब्दील होकर मेडिकल स्टूडेंट्स के पास पहुच रही है | विदित हो की एमबीबीएस के फर्स्ट ईयर में एनाटोमी के दो पेपर होते है | इनमे मानव शरीर के विभिन्न पार्ट्स के बारे में बताया जाता है इनमे स्केलटन सिस्टम की भी पढ़ाई होती है | इसके लिए स्टूडेंट बाजार से बॉन खरीदते है | आर्टीफिशियल बॉन भी बाजार में उपलब्ध है | बताया जाता है की सफाईकर्मी लावारिश लाशो से मांस नोचकर हटा देते है फिर उसे तेज़ाब से साफकरने के बाद हड्डियों को उबालते है | इसके बाद उपयोग लायक नरकंकाल बनता है | सूत्रों की माने तो सफाई कर्मी एक कंकाल के लिए करीब 10 हजार रूपए लेते है | जिसमे अंदर से नीचे तक सबो का कमीशन फिक्स होता है | एसके एम सी एच के प्राचार्य डॉ। प्रो। विकाश कुमार ने भी ऐसी किसी जानकारी से
इंकार किया | उन्होंने कहा की संस्थान में नरकंकाल की खरीद बिक्री नहीं होती फिर भी वे जाच कराई जाएगी | तिरहुत प्रमंडल के आयुक्त अतुल प्रसाद ने भी मामले की जाच करा करवाई का आश्वसन दिया है |



