
नीति आयोग की 11वीं शासी परिषद की बैठक में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के समग्र विकास की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने स्पष्ट किया कि खनिज प्रदेश झारखंड को अब सिर्फ कच्चा माल देने वाले राज्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे एक मैन्युफैक्चरिंग हब और नॉलेज इकोनॉमी बनाने का संकल्प है। उन्होंने राज्य के प्रचुर संसाधनों को मानव पूंजी (Human Capital) से जोड़ने पर विशेष बल दिया और केंद्र सरकार से बड़े सहयोग की अपेक्षा की।

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वैल्यू एडिशन और औद्योगिक निवेश पर जोर
हेमंत सोरेन ने नीति आयोग के मंच पर वकालत की कि राज्य के भीतर ही खनिजों का वैल्यू एडिशन (मूल्य संवर्धन) होना चाहिए। उन्होंने झारखंड में टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ग्रीन-एनर्जी, लॉजिस्टिक्स और एग्रो-फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश को बढ़ावा देने की मांग की। इसके साथ ही, राज्य को उद्योग और रोजगार का नया केंद्र बनाने के लिए एआई-बेस्ड मिनरल एक्सप्लोरेशन और सस्टेनेबल माइनिंग प्रैक्टिसेज को अपनाने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास का संकल्प
‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए शिक्षा और स्वास्थ्य को विकास का मूल आधार बताया गया।
शिक्षा: राज्य सरकार 5000 उत्कृष्ट विद्यालय (सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस) बनाने के लक्ष्य पर काम कर रही है। उन्होंने केंद्र से पीएम श्री और केंद्रीय विद्यालयों की संख्या बढ़ाने तथा झारखंड में NCERT का क्षेत्रीय केंद्र स्थापित करने का आग्रह किया।
कौशल विकास: सारथी योजना के तहत 6.76 लाख युवाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है। अब एआई, ईवी, ड्रोन और सोलर जैसे आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में युवाओं और महिलाओं को तैयार किया जा रहा है।
स्वास्थ्य: पंचायत स्तर तक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है और एआई आधारित डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल बनाने पर काम जारी है।
कृषि, पोषण और खेल में उपलब्धियां
राज्य में कुपोषण से लड़ने के लिए 10 लाख से अधिक पोषण वाटिकाएं विकसित की गई हैं। राज्य सरकार अपने संसाधनों से 5000 नए आंगनबाड़ी भवन बना रही है। खेल के क्षेत्र में झारखंड के खिलाड़ियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन को देखते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना के साथ-साथ राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं की मेजबानी सौंपने की मांग रखी।
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केंद्र सरकार से की गई प्रमुख वित्तीय और प्रशासनिक मांगें
झारखंड के विकास की गति को तेज करने के लिए केंद्र सरकार के सामने ये मुख्य मांगें रखी गईं:
कोयला कंपनियों पर बकाया 1.36 लाख करोड़ रुपये का जल्द भुगतान किया जाए।
जल जीवन मिशन के तहत शेष 6000 करोड़ रुपये की राशि तुरंत जारी हो।
पीपीपी मोड में 6 नए मेडिकल कॉलेजों में से शेष 2 को शीघ्र स्वीकृति दी जाए।
डीवीसी (DVC) और सीसीएल (CCL) कमांड एरिया के तहत आने वाले जिलों में सामाजिक बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण और स्वामित्व प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाए।


