परसुडीह में भागवत कथा का छठवां दिन
जमशेदपुर। परसुडीह सोसाइटी काॅलोनी स्थित श्री शिव दुर्गा हनुमान मंदिर में चल रहे भागवत कथा सप्ताह के छठवें दिन सोमवार को कथावाचक आचार्य प्रसन्न कुमार शास्त्री ने कृष्ण रसलीला, कन्हैया प्रेम, माखन चोरी कथा का प्रसंग सुनते हुए कहा कि अपने मित्रों को माखन खिलाने के लिए कन्हैया ने माखनचोरी लीला की। श्रीकृष्ण माखनचोरी की योजना सखाओं के समक्ष रखते हैं कि किस प्रकार हम सब मिलकर गोपियों के घर से माखन की मटकी उठा लाएंगे, खाएंगे, पशु-पक्षियों को खिलायेंगे, गिराएंगे और माखन की कीच मचाएंगे। जिन श्रीकृष्ण के घर नौ लाख गाएँ थीं, उनको माखन चुराकर खाने की आवश्यकता नहीं थी। फिर भी अपने ग्वालवालों को खिलाने के लिए (बंदरों को भी श्रीकृष्ण ने माखन खिलाया है क्योंकि रामावतार में बंदरों ने उनकी लंका विजय में सहायता की थी) और गोपियों को आनन्दित करने के लिए माखन चोरी करते और यशोदामाता की प्रेम भरी झिड़की सुनते और मां का गुस्सा शांत करने के लिए प्रेम से कहते हैं कि ये हाथी के समान मोटी-मोटी गोपियां और कहां मैं हिरन के बच्चे जैसा। मां तू किससे मेरी तुलना कर रही है, तू तो बहुत भोली है जो उनकी बातों में आ जाती है। कथा का रसपान कराते हुए आचार्य ने आगे कहा कि भगवान के प्रति स्नेह, प्रीति, रति वह अंगार है जो मन के कामबीज को भून डालता है। जैसे भुने हुए बीज में अंकुर उत्पन्न नहीं होता, वैसे ही कृष्णासक्त मन में संसार की वासनाओं को अंकुरित होने का अवसर ही नहीं मिलता। कृष्ण एक बहुत नटखट बच्चे हैं। वे एक बांसुरी वादक हैं और बहुत अच्छा नाचते भी हैं। वे अपने दुश्मनों के लिए भयंकर योद्धा हैं। कृष्ण एक ऐसे अवतार हैं जिनसे प्रेम करने वाले हर घर में मौजूद हैं। वे एक चतुर राजनेता और महायोगी भी हैं। वो एक सज्जन पुरुष हैं, और ऐसे अवतार हैं जो जीवन के हर रंग को अपने भीतर समाए हुए हैं। कन्हैया प्रेम व माखन चोरी की कथा पर श्रद्धालु खुबझुमे। मंगलवार 19 फरवरी को कथा का विश्राम हैं।




