सोमवार को शहरी विकास मंत्रायल द्वारा जारी स्वच्छता सर्वे द्वारा चौंकानेवाला परिणाम आने के बाद
संतोष कुमार
जमशेदपुर।
क्लीन सिटी, ग्रीन सिटी का अवार्ड पानेवाले जमशेदपुर शहर को पूरा देश स्वच्छ शहर के रूप में जानता है. लेकिन जिस प्रकार से सोमवार को शहरी विकास मत्रालय द्वारा स्वच्छता सर्वे के आधार पर टॉप दस शहरों में जमशेदपुर के नाम की घोषणा की गई उसमें जमशेदपुर में नागरिक सुविधा प्रदान करनेवाली टाटा स्टील की सब्सिडियरी कंपनी जुस्को के दावों की पोल खोलकर रख दी गई है. हालांकि केंद्र की इस सर्वे रिपोर्ट में कर्नाटक का मैसूर को देश को सबसे स्वच्छ शहर से नवाजा है वहीं पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी को भी गंदे शहरों की सूची में शुमार किया गया है. ऐसे में स्टील सिटी ग्रीन सिटी और क्लीन सिटी के नाम से जाना जाने वाला लौहनगरी जमशेदपुर की स्वच्छता के दावों पर प्रश्नचिह्न लगता दिखाई दे रहा है. टाटा स्टील कंपनी के कमांड एरिया के 10 किलोमीटर की परिधि में हालांकि स्वच्छता की तस्वीर कुछ हद तक तो दिखती है लेकिन जमशेदपुर से सटे बड़ी आबादी वाले क्षेत्रों में गंदगियों का अंबार देखने को मिलता है. जिसे हम बोलचाल की भाषा में वृहद जमशेदपुर कहते हैं. केंद्र की शहरी विकास मंत्रालय द्वारा कराये गये सर्वे के पैमाने पर हम गौर करें तो जमशेदपुर में 500 मीटर के अंदर हर 10 में से 3 से भी कम लोगों को पब्लिक टॉयलेट की सुविधा उपलब्ध है, वहीं जिन लोगों को सर्वे में शामिल किया गया, उनमें से हर 10 में से 9 लोगों के घरों में शौचालय की सुविधा थी. सर्वे में शामिल हर 10 में से सिर्फ 2 लोगों ने पाया कि उनका इलाका हमेशा साफ रहता है. हर 10 में से सिर्फ 2 लोगों ने कहा कि कचरा फेंकने के लिए उन्हें डस्टबिन दिखाई देता है जो शहरी विकास मंत्रालय के द्वारा कराये गये सर्वे के मानकों के अनुरूप नहीं है. ऐसे में सूबे की सरकार की सत्ता की धुरी बना जमशेदपुर को डर्टी शहर में शामिल करना कहीं न कहीं सरकारी दावों के साथ-साथ कार्पोरेट से जुड़े लोगों की भी पोल खोलता है.
हालांकि इसके लिए जमशेदपुर की जनता भी कम जिम्मेवार नहीं है. कचरों के निष्पादन के लिए ठोस स्थान नहीं होने कारण लोग जहांतहां कचरों को फेंकर अपनी जिम्मेवारी भूल जाते हैं. जिसका परिणाम ये हुआ कि केन्द्रीय सर्वे में लौहनगरी को सबसे गंदे शहरों में शामिल कर लिया गया. स्थानीय निकायों में सफाई के नाम पर जो फंड दिए जा रहे हैं वो कहां खर्च किए जा रहे हैं ये जांच का विषय है. सर्वे जिस आधार पर की गई है वो बिल्कुल सही है. टाटा लीज एरिया से बाहर निकलते ही आपको स्वतः ही गंदगी का अंबार देखने को मिलेगा. हालांकि टाटा लीज एरिया भी फिलहाल इससे अछूता नहीं है शहर के सुबर्णरेखा नदी के किनारे से बने मेरीन ड्राईव में चले जाईए जहां गंदगी का अंबार देखकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे. यो सारी गंदगी नदी में जाकर नदी को भी प्रदूषित करती है. अब आप स्वयं तय कर सकते हैं कि डर्टी जमशेदपुर के लिए जिम्मेवार कौन है.




