
जमशेदपुर।
जिनके घर में भोजन पकाने वाला कोई नहीं है और रोज रोज बाजार की चटोरी चीजें खाने को मजबूर है वैसे लोगो के लिए मुंबई की तर्ज़ पर शहर में भी डब्बेवाला सेवा की शुरुवात होने जा रही हैं , फर्क बस इतना है की यहाँ डब्बावाला नहीं बल्कि डब्बेवाली सेवा का संचालन करेंगी I
टेल्को अलोक विहार निवासी पूनम श्रीवास्तव अपनी ज़िन्दगी की दूसरी पारी में अपनी साथी महिलाओं के लिए आदर्श बनते हुए “घर की रसोई” नाम से सुविधा की शुरुवात की है I जमशेदपुर की बेटी ने एयरकंडीशनर में विशेषज्ञता करके अपनी गृहस्थी बसाने उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद की बहु बन कर रह गयी थी और पति बीoपी श्रीवास्तव के साथ मिलकर इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद प्रोडक्ट्स के होलसेल धंधे में
रम भी गयी थी I प्रकृति ने दो बेटियां भी दी , लेकिन शायद इश्वर ने भाग्य में कुछ और लिख रखा था I वर्ष 2006 में में पति की आकस्मिक मृत्यु ने इनको झकझोर दिया और इसके बाद अपने अस्तित्व के लिए वे संघर्ष की स्थिति में रहीं I हालाँकि ससुराल वालों का व्यव्हार समान्य ही था मगर अपने दम पर कुछ एकदम नया करने की योजना दिमाग में घूमने लगी और फिर ख्याल आया “घर की रसोई “ का हालाँकि फ़िलहाल प्रयोग के तौर पर यह सेवा सिर्फ टेल्को इलाके में ही शरू की गयी है I
दोनों प्रकार का मिलेगा खाना
श्रीमती श्रीवास्तव ने बताया की उनकी रसोई में शाकाहारी और मांसाहारी दोनों प्रकार के भोजन मिलेंगे और नए ग्राहक चाहे तो ऑनलाइन www.gharkirasoi.org.in पर अपना आर्डर कर सकते है लेकिन अभी ये सेवा केवल टेल्को इलाके और आसपास के लिए ही होगी , आगामी 3 से 4 महीने के बाद इसका विस्तार पुरे जमशेदपुर स्तर पर करने का इरादा श्रीमती श्रीवास्तव रखती है I
कमजोर नहीं नारी : पूनम
श्रीमती पूनम दो बेटियों की माँ है बड़ी बेटी स्तुति प्रकाश नॉएडा स्थित hdfc बैंक में कार्यरत है और छोटी बेटी शिवांगी प्रकाश स्थानीय NIIT जमशेदपुर केंद्र से कंप्यूटर में त्रि वर्षीया डिग्री कोर्स कर रही है I पूनम कहती है की मैंने पेशा नया चुना और वो भी घर की दहलीज़ लेंगे बिना I महिलाएं अब कमज़ोर नहीं वो चाहें तो अपने दम पर अपने परिवार को पाल सकती है और अपना एक आदर्श उदहारण अपने बच्चों और परिवार के समक्ष प्रस्तुत कर सकती हैं I लेकिन महिलाओं को भी मर्यादा का ध्यान रखना होगा और सरकार से तथा बैंको से आग्रह है की इस तरह के लघु गृह उद्योगों के प्रोत्साहन के लिए आगे आना चाहिए जिस से ग्रामीण महिलाओं को रोज़गार दिया जा सके I

