
रांची, 7 सितम्बर। झारखण्ड स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक के शहीद चौक रांची स्थित मुख्यालय में आज दोपहर दो महिला बैंक डाईरेक्टरों तथा महिला बैंक कर्मियों ने बैंक में गलत तरीके से मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी बन कर निदेशकों तथा बैंक गतिविधयों के लिए बने कक्ष में कब्जा जमा कर बैठे बी. के. चौधरी को पुलिस की उपस्थिति में निकाल कर बाहर खदेड़ दिया।


ज्ञातब्य हो कि निबंधक सहयोग समितियां झारखण्ड सरकार श्रीमती सुचित्रा सिन्हा IAS ने नाजायज तरीके से रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के फिट एण्ड प्रॉपर क्राईटेरिय का उल्लंघन कर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी बी. के. चौधरी की प्रतिनियुक्ति को गलत ठहराते हुए बैंक के अध्यक्ष को भी कारण बताओ नोटिस पत्रांक 2675 (7) 07 की बैंक जांच 13/19 द्वारा जारी किया था। इसके बावजूद कार्यपालक पदाधिकारी बी. के. चौधरी तथा अध्यय़क्ष की मिलीभगत से अनाधिकृत रूप से अनाप-शनाप आदेश निकाल कर बैंक को भारी आर्थिक क्षति पहुंचा रहे थे। हाल ही में उन्होने अनाधिकार डेढ़ सौ आदिवासी, पिछड़े हरिजन तथा स्थानीय झारखंड युवकों को कम्प्युटर ऑपरेटरों का आई.डी. छीन कर उन्हें नौकरी से निकालने की साजिश किया था, जिसके खिलाफ 6 सितम्बर को बैंक के छह निदेशकों सुनयना पाठक, कौशिल्या कुजूर, सुरेन्द्र यादव, रघुनाथ यादव तथा शम्भुचरण कर्मकार एवं सहकारिता अध्ययन मंडल के अध्यक्ष विजय कुमार सिंह के नेतृत्व में बैंक मुख्यालय पर धरना एवं प्रदर्शन किया था।
निबंधक द्वारा निष्कासित मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी बी. के. चौधरी ने निदेशकों, लैम्पस, पैक्स के प्रतिनिधियों के कक्ष पर कब्जा कर लिया था। आज निदेशकों ने निबंधक के आदेश के आलोक में कक्ष को बी. के. चौधरी से मुक्त करवाया। निदेशक सुनयना पाठक ने कहा कि निबंधक के 29 अगस्त के आदेश के आलोक में पदमुक्त होने के बाद जो भी आदेश निकाला है वह गलत है। उन्होने अध्यक्ष से तत्काल सभी कम्प्युटर ऑपरेटरों की आई.डी. बहाल कर उन्हें काम करने देने का निदेश दिया। उन्होने बैंक के सभी 140 प्रतिनिधियों की असाधारण आमसभा बुलाकर बैंक में मचे लूट को रोकने की मांग भी निबंधक से किया है।

