। जामताड़ा
वरदे वीणा वादिनी वरदे… बसंत पंचमी के मौके पर जामताड़ा जिला में मां शारदे का दरबार सज चुका है और उनकी स्तुति हो रही है। मां सरस्वती की आराधना में मंत्रोंच्चारण से वातावरण गूंज उठा। सरस्वती पूजा को लेकर विद्यार्थियों और बच्चों में उत्साह देखते ही बन रहा था। पूजा को लेकर बीते देर रात से ही पूजा पंडालों को रात में हीं अंतिम रूप दे दिया गया था। जिला के शिक्षण संस्थानों के अलावा गली मोहल्ले में भी मां सरस्वती की आराधना की जा रही है।
शास्त्रों के अनुसार मां को पीला रंग पसंद है इस कारण पीले रंग का मीठा, चावल, खिचड़ी, बुंदिया लड्डू के आलावा खीर मां को चढ़ाया जाता है। कुछ लोग इस दिन पीला वस्त्र भी पहनते हैं। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने पीतांबर धारण कर मां की पूजा अर्चना की थी। इसी दिन से पीला वस्त्र पहनने की परंपरा शुरू हुई। पीला के अलावा मां को सफेद रंग भी प्रिय है।
सरस्वती पूजा को लेकर कई दिनों से तैयारी चल रही थी। विद्या की देवी सरस्वती माता की पूजा पूरे शहर के कई स्कूलों, कॉलेजों और चौक-चौराहों पर बड़े ही धूमधाम से शनिवार को मनाई गई। श्रद्धालुओं ने पूरे श्रद्धा के साथ ऋतुराज बसंत के आगमन पर बसंत पंचमी और ज्ञान की देवी मां सरस्वती की आराधना करते नजर आए। कई जगहों पर कोरोना महामारी को देखते हुए भीड़ भाड़ नहीं लगने को लेकर व्यवस्था की गई थी। कई जगहों पर स्थानीय लोगों को अपने छोटे बच्चों को पहली बार पेंसिल और कॉपी पकड़ाने की भी प्रथा देखी गई। पूछने पर पता चला की हिंदू आस्था के अनुसार बसंत पंचमी के मौके पर मां सरस्वती पूजा के दिन छोटे बच्चों को पेंसिल और कागज छूने की प्रथा पुरानी है। ऐसा करने से मां सरस्वती की कृपा सदैव उन बच्चों पर बनी रहती है।




