जामताड़ा: झारखंड निर्माता और पद्म भूषण से सम्मानित दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि पर जामताड़ा की मिट्टी और यहाँ की जनता का हृदय आज भी गहन पीड़ा से व्याकुल है। उनके निधन के एक साल बाद भी उनके विचार, उनके द्वारा दिखाए गए मार्ग और उनका संघर्ष लोगों के दिलों में जीवित हैं। जामताड़ा वह ऐतिहासिक भूमि है, जहां से उनके जीवन का पहला बड़ा राजनीतिक और सामाजिक संघर्ष उभरा था। महाजनी प्रथा के घोर अत्याचार, आदिवासियों की जमीनों की बेदखली और समाज में फैले अन्याय के विरुद्ध उन्होंने जामताड़ा को ही अपना सबसे प्रारंभिक और मजबूत मंच बनाया था। इसी धरती पर उन्होंने अपने आंदोलन का जो बीज बोया था, वही आगे चलकर वृहद झारखंड आंदोलन की सबसे मजबूत जड़ बना। यह भावुक बातें जामताड़ा के दिवंगत विधायक विष्णु भैया के पूर्व निजी सचिव मनोज झा ने शिबू सोरेन की पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित एक विशेष श्रद्धांजलि सभा में कहीं।
READ MORE :CHAIBASA NEWS: कोल्हान विश्वविद्यालय का बड़ा कदम, शैक्षणिक सत्र को नियमित करने के लिए जारी किया अकादमिक व परीक्षा कैलेंडर
विष्णु भैया के त्याग और शिबू सोरेन के जामताड़ा प्रतिनिधित्व की यादें
मनोज झा ने अतीत के संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि जब जामताड़ा के तत्कालीन और लोकप्रिय विधायक विष्णु भैया ने झारखंड राज्य के व्यापक हित में स्वेच्छा से अपना पद त्याग दिया था, तब दिशोम गुरु शिबू सोरेन जामताड़ा के जनप्रतिनिधि बने थे। सम्पूर्ण झारखंड ने गुरु जी को एक सफल मुख्यमंत्री के रूप में देखा और स्वीकारा है, लेकिन जामताड़ा वासियों के लिए यह हमेशा से एक विशेष गर्व का विषय रहा है कि वे यहां के सांसद भी रहे और विधायक भी। उन्होंने जामताड़ा और पूरे संथाल परगना क्षेत्र की दबी हुई आवाज को एक नई ताकत दी। उन्होंने हर एक जमीनी कार्यकर्ता को सामाजिक न्याय और संघर्ष की राह पर अडिग रहने का आत्मबल प्रदान किया। यही कारण है कि जामताड़ा के कार्यकर्ता आज भी उनके महान विचारों को पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ जीवित रखे हुए हैं।
आदिवासी अस्मिता, जल-जंगल-जमीन के अधिकार की लंबी लड़ाई
मनोज झा ने अपने संबोधन में आगे कहा कि झारखंड निर्माता दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने अपना संपूर्ण जीवन केवल आदिवासी अस्मिता, जल-जंगल-जमीन के मूल अधिकार और एक अलग झारखंड राज्य की स्थापना के लिए पूरी तरह से समर्पित कर दिया। शोषितों और वंचितों को उनका हक दिलाने के लिए उन्होंने कई यातनाएं सहीं, लेकिन कभी समझौता नहीं किया। उनके दृढ़ संकल्प, अथक मेहनत और अटूट संघर्ष ने ही आज के झारखंड को एक स्वतंत्र और मजबूत पहचान दिलाई है। उनके इस अद्वितीय योगदान ने राज्य की राजनीतिक और सामाजिक दिशा को पूरी तरह से बदल कर रख दिया।
आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा रहेंगे प्रेरणास्रोत
शिबू सोरेन का समूचा जीवन संघर्षों की एक ऐसी खुली किताब है, जिसने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी सम्मान और स्वाभिमान से जीने का अधिकार सिखाया। आज उनकी पहली पुण्यतिथि पर जामताड़ा की जनता उन्हें नम आंखों से याद कर रही है। उनके द्वारा स्थापित किए गए आदर्श और उनकी ऐतिहासिक उपलब्धियां राज्य की आने वाली सभी पीढ़ियों के लिए सदा एक महान प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी।