जिला न्यायाधीश सह कस्टोडियन ने अगले आदेश तक काम करने को कहा
जमशेदपुर। गुरु गोविंद सिंह जी की जन्म स्थली तख्त श्री हरमंदिर जी पटना साहिब के पूर्व महासचिव महेंद्र सिंह ढिल्लन की दलील को खारिज करते हुए पटना के जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा तख्त श्री हरमंदिर जी पटना साहिब के कस्टोडियन न्यायमूर्ति सुनील दत्त मिश्रा ने प्रधान अवतार सिंह हित की कमेटी को मान्यता प्रदान कर दी है। इस आशय का पत्र जिला एवं सत्र न्यायाधीश के द्वारा शनिवार को जारी कर दिया गया है।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने अगले आदेश तक तख्त श्री हरमंदिर जी पटना साहेब के संविधान के अनुसार अगले आदेश तक काम करने को कहा है। इस आदेश के मिलते ही अवतार सिंह हित एवं उनके समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई है। अन्यथा यह अंदेशा बना हुआ था कि कानूनी कार्रवाई में मामला लंबा कीजिएगा और पुरानी कमेटी ही कार्य करती रहेगी।
गत 25 जुलाई को नई कमेटी के गठन के लिए कार्यसमिति की बैठक आहूत की गई थी। इसमें बतौर पर्यवेक्षक पटना सिटी के एसडीओ थे।
अवतार सिंह हित के समर्थन में सरदार इंदरजीत सिंह जगजीत सिंह सोही लखविंदर सिंह हरबंस सिंह खनूजा कमीकर सिंह, गोविंद सिंह लोगोंवाल रहे वही महेंद्र सिंह ढिल्लन, पूर्व सचिव महेंद्र सिंह छाबड़ा एवं सदस्य राजा सिंह थे। कॉप्ट सदस्य हरपाल सिंह जोहल निलंबित थे।
बैठक में महेंद्र सिंह ढिल्लों ने पहले हरपाल सिंह जोहल की सदस्यता को लेकर सवाल उठाया और बाद में उसे बैठक में शामिल करवा लिया परंतु बहुमत अवतार सिंह हित के पक्ष में दिखा, बैठक में हित की मुहर लगी तो उन्होंने एसजीपीसी नामित सदस्य गोविंद सिंह लोंगोवाल का तनखेया घोषित होने का झूठा हवाला देकर एक तरफा कार्रवाई करते हुए बैठक स्थगित करने की घोषणा की। इसके साथ ही महेंद्र सिंह ढिल्लन ने कहा था कि वह अगली बैठक बुलाएंगे जिस पर कमेटी गठन पर कार्रवाई होगी। महेंद्र सिंह ढिल्लों ने बैठक नहीं होने का हवाला देते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश के कार्यालय में लिखित जानकारी दी और उन्होंने नए महासचिव सरदार इंद्रजीत सिंह को कार्यभार सौंपने से ही मना कर दिया था। तब इंदरजीत सिंह अध्यक्ष अवतार सिंह के कक्ष में ही बैठ कर काम करने लगे।
इधर पुराने अनुभवी अवतार सिंह हित ने मिनट्स और संविधान तथा पक्ष में बहुमत होने की जानकारी दी। गोविंद सिंह लोंगोवाल प्रकरण से भी जिला जज को अवगत कराया गया। ढिल्लन को जत्थेदार ज्ञानी रंजीत सिंह ने कार्यभार सौंपने का निर्देश दिया तो उसका अनदेखी उन्होंने कर दी थी।
पर्यवेक्षक की रिपोर्ट एवं कागजातों के अध्ययन के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने शनिवार को अवतार सिंह हित की कमेटी पर मुहर लगा दी। इस कमेटी में जमशेदपुर के इंदरजीत सिंह महासचिव, पटना के जगजीत सिंह सोही उपाध्यक्ष, कटिहार के लखविंदर सिंह उपाध्यक्ष एवं पटना के हरबंस सिंह खनूजा सचिव है।
जमशेदपुर के समर्थकों ने मोर्चा संभाला
जमशेदपुर। तख्त श्री हरमंदिर जी पटना साहिब की नई कमेटी के गठन के हंगामेंदार होने के पूरे आसार थे। पूर्व महासचिव महेंद्र सिंह ढिल्लन हर हाल पर पद पर बने रहना चाहते थे और उन्होंने येन केन प्रकारेण अपनी ओर से बैठक की प्रारंभिक कार्रवाई से चुनाव होने की प्रक्रिया तक अड़ंगा डालते रहे।
चुनावी प्रक्रिया पूरी होने और मात खाने के बाद भी महेंद्र सिंह ढिल्लन एवं उसके समर्थक हरपाल सिंह जोहल हथियार डालने के पक्ष में नहीं थे। महेंद्र सिंह ढिल्लन ने दफ्तर खाली करने और कार्यभार नए महासचिव इंदरजीत सिंह को सौंपने से साफ इनकार कर दिया था।वहां हरपाल सिंह जोहल ने अपने कई समर्थकों को जुटान कर रखा था। लेकिन वहां झारखंड सिख प्रतिनिधि बोर्ड के अध्यक्ष गुरचरण सिंह बिल्ला कार्यकारी अध्यक्ष शमशेर सिंह सोनी चेयरमैन कुलविंदर सिंह पन्नू सहित जमशेदपुर के कई गुरुद्वारा कमेटियों के पदाधिकारी इंदरजीत सिंह के समर्थन में डटे हुए थे।
लेकिन अवतार सिंह हित एवं इंदरजीत सिंह ने साफ कर दिया था कि हाथापाई तक भी मामला नहीं पहुंचना चाहिए। जिससे पुलिस कार्रवाई हो अथवा तख्त की बदनामी हो अथवा कानूनी मामला बन जाए।
बड़ी संख्या में होने के बावजूद इंद्रजीत सिंह के समर्थकों ने धैर्य बनाए रखा और उस धैर्य का पुरस्कार शनिवार को मिल गया जब जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने नई कमेटी पर अपनी मुहर लगा दी।
