जमशेदपुर: झारखंड प्रदेश कांग्रेस की नई ‘जंबो कमेटी’ का रविवार को विधिवत गठन कर दिया गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश और प्रदेश कांग्रेस के सह प्रभारी भूपेंद्र मारावी ने संयुक्त रूप से इस नई कार्यकारिणी की घोषणा की। हालांकि, इस बहुप्रतीक्षित कमेटी की घोषणा के साथ ही पार्टी के अंदर असंतोष, गुटबाजी और विरोध के स्वर मुखर होने लगे हैं। कोल्हान और विशेषकर जमशेदपुर के कई पुराने और निष्ठावान कांग्रेसी नेताओं की अनदेखी का आरोप लगाते हुए पार्टी के ही कार्यकर्ताओं ने प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
नलिनी सिन्हा का तीखा हमला: ‘गणेश परिक्रमा करने वालों को मिले पद’
जमशेदपुर की मुखर कांग्रेस महिला नेत्री नलिनी सिन्हा ने सोशल मीडिया के माध्यम से नई कमेटी के गठन पर गंभीर और सीधे सवाल उठाए हैं। उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट में प्रदेश नेतृत्व पर तीखा प्रहार करते हुए लिखा है कि प्रदेश कांग्रेस ने सिर्फ “गणेश परिक्रमा” (चाटुकारिता) करने वालों को ही संगठन में महत्वपूर्ण पद बांटे हैं।
उन्होंने अपनी पोस्ट में स्पष्ट रूप से लिखा कि पूर्वी सिंहभूम के पूर्व जिलाध्यक्ष आनंद बिहारी दुबे का अध्यक्षीय कार्यकाल स्वर्णिम रहा था, लेकिन नई कमेटी में उन्हें केवल प्रदेश कोऑर्डिनेटर का पद देकर महज खानापूर्ति कर दी गई। इसके साथ ही, नलिनी सिन्हा ने आरोप लगाया कि पार्टी के लिए अपना पूरा जीवन और जवानी समर्पित करने वाले विजय खां, केके शुक्ला, कमलेश पांडेय और अखिलेश यादव जैसे दिग्गज व निष्ठावान नेताओं को पूरी तरह से हाशिए पर धकेल कर अनदेखा कर दिया गया है।
महिलाओं की उपेक्षा और प्रतिनिधित्व पर उठे सवाल
कांग्रेस नेत्री ने संगठन में महिला प्रतिनिधित्व को लेकर भी प्रदेश अध्यक्ष पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्वी सिंहभूम जिले से महिलाओं को नई कमेटी में उचित जगह नहीं दी गई है। जिले से एकमात्र महिला नेत्री सुधा गुप्ता को जो जगह दी भी गई है, वह भी सिर्फ एक खानापूर्ति प्रतीत होती है। उन्होंने संगठन चलाने के वर्तमान तरीके पर कड़ा तंज कसते हुए अपनी पोस्ट में लिखा, “ऐसे चलाइयेगा कांग्रेस संगठन… धन्य है प्रदेश अध्यक्ष व उनकी चाटुकारिता करने वाले लोग।”
आदिवासी-मूलवासी और पुराने कार्यकर्ताओं का छलका दर्द
नलिनी सिन्हा की इस सोशल मीडिया पोस्ट के बाद अन्य कांग्रेस कार्यकर्ताओं का दर्द भी छलक कर बाहर आ रहा है। कांग्रेस नेता सुबोध सिंह सरदार ने इस पोस्ट पर कमेंट करते हुए निराशा जताई है। उन्होंने लिखा है कि सबसे ज्यादा अफसोस इस बात का है कि जिले के ग्रामीण क्षेत्रों से किसी भी आदिवासी और मूलवासी नेता को कमेटी में सिरे से जगह नहीं दी गई। उन्होंने प्रदेश नेतृत्व पर कटाक्ष करते हुए कहा कि हम केवल मंचों से आदिवासी-मूलवासी की बात करते हैं, लेकिन जब हक देने की बारी आती है तो उन्हें किनारे कर दिया जाता है।
वहीं, एक अन्य कार्यकर्ता नवनीत कुमार मिश्रा ने नलिनी सिन्हा की पोस्ट का समर्थन करते हुए कमेंट बॉक्स में लिखा कि जो लोग पिछले 40 सालों से लगातार पार्टी की निस्वार्थ सेवा कर रहे हैं और जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी कांग्रेस के झंडे को बुलंद करने में लगा दी, उनको इस तरह से दरकिनार करना पूरी तरह से गलत है। जंबो कमेटी गठन के तुरंत बाद उठे इस भारी विरोध ने आगामी चुनावों से पहले प्रदेश कांग्रेस के लिए एक नई और बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।



