जमशेदपुर। गोलमुरी मनिंदर टावर में चल रहे आठ दिवसीय भागवत कथा के दूसरे दिन शुक्रवार को वृन्दावन धाम से आये आचार्य पंडित सुरेश चन्द्र शास़्त्री जी महाराज ने व्यासपीठ से सृष्टि के निर्माण, भगवान विष्णु के वराह अवतार, प्रजापति दक्ष के धर्म परिवार का वर्णन और शिव-पार्वती विवाह (सती विवाह) की दिव्य कथाएं सुनाई, जो ईश्वर की रचना और जीव के कल्याण के प्रसंगों को दर्शाता है। कथा वाचक ने कहा कि शिव-पार्वती विवाह एक अलौकिक प्रसंग है, जो पार्वती जी की कठोर तपस्या, कामदेव के दहन, और भूतों-प्रेतों के साथ शिव की विचित्र बारात के बाद हिमालय में विधि-विधान से संपन्न हुआ। यह प्रसंग सिद्ध करता है कि सच्चा प्रेम और दृढ़ तपस्या से ही प्रभु को पाया जा सकता है।आचार्य ने आगे कहा कि संसार गहन भम्र जाल है। ज्ञान के प्रकाश से ही इस भ्रमजाल को काटा जा सकता है। अज्ञानतावश ही हम बहुत से भ्रम पाल लेते हैं। इस संसार में भगवान के बिना हमारा कोई सच्चा साथी नहीं है। हमारे पास अपार धन दौलत होने के बाद भी पर लोक में ये सब कुछ काम आने वाला नही है। एक पाई भी साथ नही जाती, वहां जीवन मे किये पाप पुण्य ही जाते है जिससे प्राणी सुख एव दुख भोगता है। आज के समय मे धन तो बहुत कमाया पर संस्कार लुप्त होते जा रहे हैं। जब तक संस्कार शुद्ध नहीं होगे तब तक शन्ति का अनुभव नहीं होगा। इसका आयोजन गोलमुरी के चम्पा-रतन अग्रवाल (गोयल परिवार) द्धारा रोजाना शाम 4 से 7 बजे तक किया जा रहा हैं। तीसरे दिन शनिवार को कथा वाचक द्धारा धु्रव चरित्र, श्री वामन चरित्र, पुरंजन उपाख्यान, जड़भारत चरित्र, अजामिल कथा, श्री प्रहलाद चरित्र का प्रसंग सुनाया जायेगा। इस मौके पर प्रमुख रूप से पार्वती देवी, रतन अग्रवाल, चम्पा अग्रवाल, गोविंद अग्रवाल, माधव अग्रवाल सहित काफी संख्या में भक्तगण भगवान की कीर्तन श्रवण कर आनन्द प्राप्त किया।



