जमशेदपुर: बिष्टुपुर स्थित जमशेदपुर वीमेंस यूनिवर्सिटी के परिसर में शनिवार को “व्यक्तित्व विकास में हस्तलेखन का महत्व” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC), वाणिज्य, व्यवसाय प्रबंधन और हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में मुंबई की ग्राफोलॉजिस्ट सोसाइटी ने तकनीकी सहयोग प्रदान किया।
लिखावट है व्यक्तित्व का दर्पण
कार्यक्रम का आयोजन कुलपति प्रो. (डॉ.) इला कुमार के मार्गदर्शन में हुआ। कार्यशाला की शुरुआत करते हुए वाणिज्य विभागाध्यक्ष डॉ. कामिनी कुमारी ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि हस्तलेखन (Handwriting) केवल कागज पर शब्द उकेरना नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के आंतरिक अनुशासन और उसके व्यक्तित्व का दर्पण है।
ग्राफोलॉजी और फॉरेंसिक विज्ञान में करियर
मुंबई से आईं मुख्य वक्ता और प्रसिद्ध ग्राफोलॉजिस्ट रिंकू अग्रवाल ने विद्यार्थियों को हस्तलेखन विश्लेषण की बारीकियों से अवगत कराया। उन्होंने इसके व्यावसायिक महत्व पर चर्चा करते हुए बताया कि:
करियर: ग्राफोलॉजी के क्षेत्र में करियर की अपार संभावनाएं हैं, विशेषकर फॉरेंसिक विज्ञान (Forensic Science) और अपराधशास्त्र (Criminology) में इसका व्यापक उपयोग होता है।
मनोवैज्ञानिक विश्लेषण: हस्तलेखन के बाएं और दाएं मार्जिन व्यक्ति के मनोवैज्ञानिक व्यवहार और उसकी भविष्य की प्रवृत्तियों को दर्शाते हैं।
लेखन शैली: सुस्पष्ट (Legible) लेखन प्रभावी संप्रेषण का आधार है, जबकि अस्पष्ट लेखन व्यक्तित्व के नकारात्मक पहलुओं को दर्शाता है।
हस्तलेखन के नमूनों का विश्लेषण
कार्यशाला के दौरान विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों से हस्तलेखन के नमूने एकत्र किए गए। रिंकू अग्रवाल ने इन नमूनों का विश्लेषण कर छात्राओं को उनकी लेखन शैली में सुधार के टिप्स दिए। इसके बाद आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर हस्तलेखन और मनोविज्ञान के अंतर्संबंधों को समझा।
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सफल आयोजन में इनकी रही भूमिका
कार्यक्रम को सफल बनाने में आईक्यूएसी डायरेक्टर डॉ. रत्ना मित्रा, विभागाध्यक्ष डॉ. कामिनी कुमारी, डॉ. पुष्पा कुमारी और डॉ. छगन लाल अग्रवाल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम का समापन डॉ. पुष्पा कुमारी के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।



