
जमशेदपुर। टाटानगर रेल सिविल डिफेंस टीम के द्वारा बागबेड़ा के लाल बिल्डिंग स्थित मल्टी डिसीप्लिनरी डिविजनल ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट (एमडीडीटीआई) में सुरक्षा और आपदा प्रबंधन जैसे अत्यंत संवेदनशील विषयों पर एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान ट्रेन के इंजन और यात्री कोच में आग लगने की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए स्मार्ट बोर्ड और पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से कर्मचारियों को रोकथाम के उपाय बताए गए। साथ ही, आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए जीवंत मॉक ड्रिल कर उन्हें प्रशिक्षित किया गया।
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विभिन्न विभागों के 80 कर्मचारियों ने लिया प्रशिक्षण
रेल कर्मचारियों के कार्य कौशल विकास और सुरक्षा जागरूकता को बढ़ाने के उद्देश्य से यह तकनीकी प्रशिक्षण केंद्र (एमडीडीटीआई) में आयोजित किया गया। रेलवे परिचालन और आधारभूत संरचना की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस शिविर में रेलवे के परिचालन, यांत्रिक, विद्युत, आरपीएफ, कमर्शियल, मेडिकल और इंजीनियरिंग विभाग के कुल 80 कर्मचारियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और आपदा प्रबंधन की तकनीकी बारीकियों को समझा।
यात्रियों की छोटी सी लापरवाही बनती है आग का कारण: संतोष कुमार
प्रशिक्षण के दौरान राष्ट्रपति पदक से सम्मानित रेल सिविल डिफेंस इंस्पेक्टर संतोष कुमार ने सासाराम और मध्य प्रदेश में दिल्ली-निजामुद्दीन एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों के इंजन और कोच में आग लगने की हालिया घटनाओं का विशेष जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं रेल कर्मचारियों के लिए गंभीर चिंतन का विषय हैं और कार्य कुशलता को और अधिक सुदृढ़ करने की तत्काल आवश्यकता है।
उन्होंने पैसेंजर ट्रेन के कोच में आग लगने के मुख्य कारणों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि अक्सर यात्री कोच के पंखे के ऊपर गुटखा के रैपर, सिगरेट या बीड़ी के टुकड़े रख देते हैं। इसके अलावा टूटे-फूटे थ्री-पिन प्लग, स्विच, अस्थायी कनेक्शन, लटकते तार, या ज्वलनशील पदार्थों की मौजूदगी से भी आग लगने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा घटनाएं तब होती हैं जब यात्री छुपकर धूम्रपान करने के बाद जलती हुई माचिस की तीली या सिगरेट के टुकड़े को लापरवाही से डस्टबिन में फेंक देते हैं। इसके साथ ही लोको इंजन में आग लगने के विभिन्न तकनीकी कारणों से भी कर्मचारियों को अवगत कराया गया।
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हमेशा आग की जड़ पर करें फायर एक्सटिंग्विशर का प्रहार
कर्मचारियों को तकनीकी जानकारी देते हुए बताया गया कि आग लगने की स्थिति में फायर एक्सटिंग्विशर (अग्निशमन यंत्र) का इस्तेमाल हमेशा आग की जड़ (Base of the fire) को निशाना बनाकर करना चाहिए। प्रायः यह देखा जाता है कि लोग घबराहट में इसका प्रयोग आग की लपटों या धुएं की ओर करते हैं, जो पूरी तरह से व्यर्थ हो जाता है। मौके पर फायर संयंत्र के इस्तेमाल के ‘पास’ (PASS) नियम और सावधानियों की विस्तृत जानकारी दी गई।
सीपीआर और मॉक ड्रिल की हुई शानदार प्रस्तुति
बेसिक लाइफ सपोर्ट प्रशिक्षण के अंतर्गत आपातकालीन स्थिति में लोगों की जान बचाने के लिए सीपीआर (CPR) और विदेशी वस्तु से वायु मार्ग के अवरोध (FBAO) की स्थिति से निपटने के लिए मॉक ड्रिल कर प्रशिक्षित किया गया। इस जीवंत मॉक ड्रिल की उत्कृष्ट प्रस्तुति सिविल डिफेंस डेमोंस्ट्रेटर अनिल कुमार सिंह और शंकर कुमार प्रसाद के द्वारा की गई। कार्यक्रम के अंत में एमडीडीटीआई के प्राचार्य पी रवि किरण ने सिविल डिफेंस टीम द्वारा दिए गए इस बेहतरीन और उपयोगी प्रशिक्षण की जमकर प्रशंसा की और सभी का धन्यवाद ज्ञापन किया।



