
जमशेदपुर, 12 मई, 2026: लौहनगरी जमशेदपुर के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले प्रख्यात भूवैज्ञानिक और दूरदर्शी विचारक प्रमथ नाथ बोस (पी एन बोस) की 171वीं जयंती आज पूरे श्रद्धाभाव के साथ मनाई गई। टाटा स्टील द्वारा आयोजित इस विशेष स्मृति सभा में भारत के इस महान सपूत के योगदान को याद किया गया, जिन्होंने देश के औद्योगिक मानचित्र को हमेशा के लिए बदल दिया।
महान भूवैज्ञानिक की विरासत को नमन
जमशेदपुर में आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम में टाटा स्टील के वरिष्ठ अधिकारियों, कर्मचारियों और टाटा वर्कर्स यूनियन के पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संदीप कुमार (वाइस प्रेसिडेंट, रॉ मटेरियल्स, टाटा स्टील) और विशिष्ट अतिथि शैलेश कुमार सिंह (उपाध्यक्ष, टाटा वर्कर्स यूनियन) ने पी एन बोस की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि पी एन बोस केवल एक भूवैज्ञानिक नहीं थे, बल्कि वे एक ऐसे विजनरी थे जिन्होंने आत्मनिर्भर भारत का सपना देखा था।
1904 का वह ऐतिहासिक पत्र जिसने बदल दिया भारत का औद्योगिक इतिहास
स्मृति सभा में पी एन बोस के उस सबसे महत्वपूर्ण योगदान की चर्चा की गई, जो जमशेदपुर की स्थापना का आधार बना। वर्ष 1904 में उन्होंने जमशेदजी नसरवानजी टाटा को एक ऐतिहासिक पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने मयूरभंज क्षेत्र में प्रचुर मात्रा में मौजूद लौह अयस्क (Iron Ore) भंडारों की जानकारी दी थी। यही वह जानकारी थी, जिसके आधार पर वर्ष 1907 में टाटा स्टील की स्थापना जमशेदपुर में हुई। उनके वैज्ञानिक अनुसंधान और दूरदर्शिता ने ही आज के आधुनिक जमशेदपुर को जन्म दिया।
विज्ञान, तकनीक और आत्मनिर्भरता के प्रबल समर्थक
पी एन बोस को भारत में तकनीकी शिक्षा और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने वाले अग्रणी महापुरुषों में से एक माना जाता है। वे न केवल खनिज अन्वेषण तक सीमित रहे, बल्कि उन्होंने राष्ट्र निर्माण में विज्ञान की भूमिका को सर्वोपरि माना। वक्ताओं ने बताया कि भूविज्ञान और खनिज अन्वेषण के क्षेत्र में उनके कार्य आज भी नई पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बने हुए हैं।
पी एन बोस जियोलॉजिकल सेंटर में विशेष व्याख्यान का आयोजन
इस अवसर पर टाटा स्टील के नेचुरल रिसोर्सेज डिवीजन (NRD) द्वारा जमशेदपुर स्थित पी एन बोस जियोलॉजिकल सेंटर में एक विशेष व्याख्यान सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र में भूविज्ञान के क्षेत्र में उनके अग्रणी कार्यों और भारत के औद्योगिक विकास को आकार देने वाली उनकी स्थायी विरासत पर विस्तार से चर्चा की गई। टाटा स्टील ने इस दौरान उनकी विरासत को संजोने के लिए स्थापित पी एन बोस मेमोरियल और जियोलॉजिकल सेंटर के महत्व को भी दोहराया।
टाटा स्टील ने वैज्ञानिक प्रगति, नवाचार और सतत विकास के प्रति पी एन बोस के दूरदर्शी विचारों को आगे बढ़ाने के अपने संकल्प को फिर से ताजा किया।



