जमशेदपुर। मानगो नगर निगम चुनाव के परिणाम के बाद शुरू हुआ राजनीतिक विवाद अब और गहराता जा रहा है। पूर्व प्रत्याशी संध्या सिंह द्वारा मानगो की नवनिर्वाचित मेयर सुधा गुप्ता के निवास प्रमाण पत्र और निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर लगाए गए आरोपों का अब करारा जवाब दिया गया है। सुधा गुप्ता के पक्ष से जारी एक कड़े बयान में संध्या सिंह के सभी आरोपों को पूरी तरह से बेबुनियाद, तथ्यहीन और भ्रामक करार देते हुए पलटवार किया गया है।
पारदर्शी चुनाव और मानहानि की चेतावनी
जारी बयान में यह स्पष्ट किया गया है कि सुधा गुप्ता ने अपना चुनाव पूर्ण पारदर्शिता, वैधानिक प्रक्रिया और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप लड़ा है। उनके सभी दस्तावेज और नामांकन निर्वाचन आयोग के नियमों के तहत विधिवत जांच के बाद ही स्वीकार किए गए थे।
बयान में कहा गया है कि मतदाता सूची या निवास से जुड़े मुद्दे पूरी तरह से प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं और इसमें किसी भी प्रकार की अनियमितता का आरोप निराधार है। उनका मतदाता पहचान पत्र भारत निर्वाचन आयोग के नियमों के तहत बना है। यह सख्त चेतावनी दी गई है कि बिना प्रमाण के इस प्रकार के झूठे और भ्रामक आरोप लगाकर जनता को गुमराह करना कानूनन मानहानि (Defamation) की श्रेणी में आता है। ऐसे भ्रामक बयान देने वालों के खिलाफ विधि सम्मत कानूनी कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित रखा गया है।
विकास कार्यों से घबराहट और ओछी राजनीति का आरोप
सुधा गुप्ता के पक्ष ने स्पष्ट किया है कि लोकतंत्र में हार-जीत स्वाभाविक है, लेकिन जनता के जनादेश को स्वीकार कर विकास कार्यों में सहयोग देना सभी की जिम्मेदारी होनी चाहिए। यह भी कहा गया कि मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है और उन्हें न्यायपालिका पर पूर्ण विश्वास है।
बयान के अनुसार, मेयर का पदभार संभालने के बाद से ही सुधा गुप्ता लगातार मानगो क्षेत्र में सक्रिय हैं और जल, सड़क, नाली जैसी समस्याओं का तेजी से समाधान कर रही हैं। कुछ लोग मानगो में हो रहे इन विकास कार्यों से घबराकर ओछी राजनीति कर रहे हैं। समर्थकों ने दावा किया है कि जनता की अदालत ने अपना फैसला दे दिया है और न्यायालय में भी सत्य की ही जीत होगी, क्योंकि “सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं।”
‘खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे’ – संध्या सिंह से पूछे गए 4 सीधे सवाल
लगाए गए आरोपों के जवाब में पलटवार करते हुए संध्या सिंह की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। उनके बयानों को ‘खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे’ की कहावत से जोड़ते हुए उनसे 4 सीधे सवाल पूछे गए हैं:
निवास की मंशा: क्या यह सच नहीं है कि आपका ससुराल चाईबासा में था और बाद में आप अपने पति के साथ मानगो में आकर बस गईं? क्या यह सिर्फ चुनाव लड़ने की मंशा से नहीं किया गया था?
नशाखोरी पर दोहरा रवैया: पूरे चुनाव के दौरान आपने नशाखोरी खत्म करने की बात की, लेकिन क्या यह सच नहीं है कि आपके पति का व्यवसाय शराब परोसने का है? क्या अपने होटल और पब में शराब बेचकर नशा खत्म करने की बात करना जनता को गुमराह करना नहीं है?
बारीडीह का निवास: क्या आप पहले बारीडीह में नहीं रहती थीं?
घूस और गिफ्ट का आरोप: चुनाव के दौरान एक भाजपा नेता ने पार्टी समर्थन के बदले महंगे गिफ्ट, पैसे और गाड़ी देने का जो आरोप आप पर लगाया था, क्या वह सही था?





