
जमशेदपुर: उम्र बढ़ने के साथ ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों के कमजोर होने) के कारण रीढ़ की हड्डी में होने वाले गंभीर फ्रैक्चर और असहनीय दर्द से जूझ रहे बुजुर्ग मरीजों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर है। जमशेदपुर स्थित टाटा मुख्य अस्पताल (टीएमएच) ने रीढ़ की हड्डी की देखभाल (Spine Care) के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने स्थानीय संज्ञाहरण (Local Anaesthesia) के तहत अत्याधुनिक बलून काइफोप्लास्टी (Balloon Kyphoplasty) प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न किया है। इस अत्याधुनिक और न्यूनतम आक्रामक (Minimally Invasive) तकनीक ने उन बुजुर्ग मरीजों के लिए एक नई उम्मीद जगाई है, जिन्हें अब तक रीढ़ के फ्रैक्चर के कारण हफ्तों तक असहनीय दर्द और लंबे समय तक बिस्तर पर रहने (Bed Rest) के लिए मजबूर होना पड़ता था।

दुर्घटना के बाद बिस्तर पर पड़ी बुजुर्ग महिला एक दिन में चलने लगी
टीएमएच के न्यूरोसर्जनों और स्पाइन विशेषज्ञों ने यह जटिल प्रक्रिया एक बुजुर्ग महिला मरीज पर की, जो एक दुर्घटना (ट्रॉमा) के बाद रीढ़ की हड्डी में गंभीर फ्रैक्चर (पैनकेक वर्टेब्रा) का शिकार हो गई थीं। असहनीय दर्द के कारण महिला पूरी तरह से बिस्तर पर आ गई थीं और उनका हिलना-डुलना भी बंद हो गया था। डॉक्टरों ने लोकल एनेस्थीसिया देकर बलून काइफोप्लास्टी प्रक्रिया की, जिसके बाद मरीज को दर्द से तुरंत राहत मिली और वह आराम से बैठने में सक्षम हो गईं। इस तकनीक की सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण यह रहा कि सर्जरी के ठीक अगले दिन महिला मरीज अपने पैरों पर चलने लगीं।
क्या है बलून काइफोप्लास्टी और कैसे काम करती है यह तकनीक?
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, 65 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्तियों और विशेषकर रजोनिवृत्ति (Post-Menopausal) के बाद महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस के कारण वर्टेब्रल कम्प्रेशन फ्रैक्चर बेहद आम हैं। समय पर इलाज न होने पर यह रीढ़ में विकृति और गंभीर विकलांगता का कारण बन सकता है। वर्टेब्रोप्लास्टी में जहां फ्रैक्चर हुई हड्डी को स्थिर करने के लिए केवल बोन सीमेंट डाला जाता है, वहीं बलून काइफोप्लास्टी एक कदम आगे बढ़कर काम करती है। इसमें पहले एक छोटे गुब्बारे (Balloon) की मदद से रीढ़ की हड्डी की ऊंचाई को वापस सामान्य किया जाता है और फिर उसमें मेडिकल सीमेंट इंजेक्ट किया जाता है। इससे न केवल फ्रैक्चर स्थिर होता है, बल्कि रीढ़ का झुकाव (Deformity) भी ठीक हो जाता है।
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लोकल एनेस्थीसिया से गंभीर बीमारियों से पीड़ित बुजुर्गों का सुरक्षित इलाज
टीएमएच की इस सफलता को इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसे सामान्य संज्ञाहरण (General Anaesthesia) के बजाय ‘लोकल एनेस्थीसिया’ में किया गया। आमतौर पर जनरल एनेस्थीसिया में हृदय रोग, मधुमेह (Diabetes) या फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित बुजुर्ग मरीजों को काफी जोखिम रहता है। लोकल एनेस्थीसिया में यह प्रक्रिया करने से मरीज का जोखिम बेहद कम हो जाता है, आईसीयू (ICU) पर निर्भरता समाप्त होती है और अस्पताल से जल्दी छुट्टी मिल जाती है। इससे अधिक जोखिम वाले मरीजों का भी सुरक्षित और आसान इलाज संभव हो गया है।
कोल्हान और झारखंड में रीढ़ की सर्जरी का प्रमुख केंद्र बना TMH
टाटा मुख्य अस्पताल में पिछले कुछ वर्षों में ऑस्टियोपोरोटिक वर्टेब्रल फ्रैक्चर के मामलों में वृद्धि देखी गई है। टीएमएच ने पिछले डेढ़ साल में 100 से अधिक वर्टेब्रोप्लास्टी और काइफोप्लास्टी प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक की हैं। वर्तमान में टीएमएच जमशेदपुर का एकमात्र और झारखंड के उन चुनिंदा अस्पतालों में से एक है, जहां यह उन्नत रीढ़ सर्जरी उपलब्ध है। पहले मरीजों को इस जटिल इलाज के लिए देश के बड़े महानगरों का रुख करना पड़ता था, जिससे भारी खर्च और समय की बर्बादी होती थी। जमशेदपुर में ही यह अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधा मिलने से पूरे झारखंड के मरीजों को उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवा का लाभ मिल रहा है।


