
जमशेदपुर । दृष्टिबाधित व्यक्तियों को डिजिटल रूप से सशक्त और पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से एक अहम पहल की गई है। शहर के साकची स्थित आम बागान दुर्गा पूजा मैदान के पास भारत स्काउट्स एवं गाइड्स कार्यालय में बुधवार, 5 अगस्त 2026 को ‘आरडब्ल्यूएस’ (Reading Without Seeing) प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। यह विशेष और प्रेरणादायक कार्यक्रम ‘एनेबल इंडिया’ (EnAble India) और ‘दिव्यांग मार्गदर्शन ट्रस्ट’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ, जिसका मुख्य लक्ष्य दृष्टिबाधित लोगों को आधुनिक तकनीकी रूप से सक्षम बनाना था।


मोबाइल स्क्रीन रीडर और डिजिटल उपकरणों का मिला विशेष प्रशिक्षण
बेंगलुरु से विशेष रूप से आए विशेषज्ञ प्रशिक्षक समीर अहमद और जे. सी. ने सभी प्रतिभागियों को डिजिटल उपकरणों के प्रभावी संचालन का गहन और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। इस महत्वपूर्ण सत्र के दौरान मोबाइल स्क्रीन रीडर के जेस्चर, दृष्टिबाधितों के लिए सुलभ मोबाइल एप्लिकेशन और रोजमर्रा के कार्यों में उपयोगी असिस्टिव टेक्नोलॉजी के बारे में विस्तार से बताया गया। इस प्रशिक्षण का सीधा लक्ष्य शिक्षा, दैनिक जीवन, स्वतंत्र गतिशीलता और रोजगार के नए अवसरों में दृष्टिबाधितों को डिजिटल रूप से स्वतंत्र बनाना है।
शहर की विभिन्न संस्थाओं के प्रतिभागियों ने लिया उत्साहपूर्वक हिस्सा
इस वृहद प्रशिक्षण शिविर में शहर की कई प्रमुख संस्थाओं ने अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की। दिव्य ज्योति नितिन विद्यालय, नेशनल एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड और टाटा स्टील फाउंडेशन के सबल सेंटर सहित कई अन्य विद्यालयों के दृष्टिबाधित प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह के साथ नई डिजिटल तकनीकें सीखीं। सभी प्रतिभागियों ने इस प्रशिक्षण को अपने दैनिक जीवन, संचार और करियर के लिए अत्यंत उपयोगी बताया, जिससे वे समाज की मुख्यधारा से और मजबूती के साथ जुड़ सकेंगे।
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सफल आयोजन में स्थानीय स्वयंसेवकों का रहा अहम योगदान
इस कार्यक्रम को सफल बनाने में आयोजकों और स्थानीय सहयोगियों की भूमिका बेहद सराहनीय रही। जगन्नाथ बेहरा, पूर्वी घोष, धीरज कुमार शर्मा, दीपक कुमार शर्मा, नरेश कुमार, अजीत कुमार, राजकुमार सिंह, श्याम शर्मा, अंशिका कुमारी, शिल्पी सिंह और प्रिया कुमारी ने अपना बहुमूल्य समय देकर कार्यक्रम को सुचारू रूप से संचालित किया। वहीं, टाटा स्टील फाउंडेशन के सबल सेंटर से मीना देवी, रवि शास्त्री, अमर शर्मा, रीमा भट्टाचार्य, सुनीता और जे. बेहरा ने भी इस नेक कार्य में अपना अहम योगदान दिया। आयोजकों ने अंत में सभी का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे डिजिटल सशक्तिकरण कार्यक्रमों को जारी रखने का दृढ़ संकल्प लिया।


