
जमशेदपुर विमेंस यूनिवर्सिटी के कॉमर्स एवं बिजनेस मैनेजमेंट विभाग द्वारा “इन्क्यूबेशन सेंटर – ए सपोर्ट सिस्टम टू स्टार्ट अप आइडियाज” विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। बिष्टुपुर परिसर के स्मार्ट ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्राओं को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर व्यावहारिक उद्यम निर्माण (Practical Entrepreneurship) के लिए प्रेरित करना था।
कुलपति के मार्गदर्शन में उद्यमिता को बढ़ावा
यह अभिनव पहल विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डॉ.) एला कुमार के कुशल मार्गदर्शन में शुरू की गई है। कार्यशाला में बी.कॉम सेमेस्टर 6 और एम.कॉम सेमेस्टर 2 व 4 की छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। विश्वविद्यालय का लक्ष्य है कि छात्राएं पढ़ाई पूरी करने के बाद केवल नौकरी खोजने वाली न बनें, बल्कि स्वरोजगार अपनाकर नौकरी प्रदाता (Job Providers) के रूप में उभरें।
स्टार्टअप आइडिया की गोपनीयता और पेटेंट का महत्व
कार्यक्रम के पहले दिन विभागाध्यक्ष डॉ. कामिनी कुमारी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि इंक्यूबेशन सेंटर नए विचारों को कॉर्पोरेट जगत से जोड़ने का काम करते हैं। तकनीकी सत्र में ‘कॅम्पस कैटलिस्ट कंसल्टिंग’ (K2C) की कॉर्पोरेट मेंटर्स डॉ. श्वेता वर्मा (प्रिंसिपल कैटलिस्ट) और तनु शर्मा (संस्थापक) ने छात्राओं का मार्गदर्शन किया। डॉ. श्वेता वर्मा ने जोर देकर कहा कि जब तक कोई बिजनेस आइडिया कानूनी रूप से पेटेंट न हो जाए, तब तक उसकी गोपनीयता बनाए रखना बेहद जरूरी है।
रियल-टाइम बिजनेस सिमुलेशन एक्टिविटी
छात्राओं को व्यावहारिक अनुभव देने के लिए चार-चार के समूहों में बांटा गया और एक त्वरित बिजनेस सिमुलेशन टास्क दिया गया। इसमें छात्राओं को:
10 मिनट में एक नया बिजनेस आइडिया सोचने,
10 मिनट में उसकी बेहतरीन मार्केटिंग रणनीति (Marketing Strategy) तैयार करने,
और अंतिम चरण में लागत निर्धारण (Costing) के साथ सटीक एमआरपी (MRP) तय करने की चुनौती दी गई।
प्रोफेशनल बिजनेस पोर्टफोलियो और रिस्क मैनेजमेंट
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कार्यशाला के दूसरे दिन का मुख्य फोकस व्यावसायिक परीक्षण और प्रामाणिकता (Validation) पर रहा। मेंटर्स ने छात्राओं द्वारा बनाए गए बिजनेस मॉडल की समीक्षा की और कमियों को सुधारा। इस दौरान छात्राओं को निवेशकों (Investors) के सामने पिचिंग करने और पेटेंट आवेदन के लिए एक प्रोफेशनल बिजनेस पोर्टफोलियो तैयार करने की ट्रेनिंग दी गई। इसके अलावा प्रोफेशनल ई-मेल आईडी बनाने, पार्टनर इक्विटी डिस्ट्रीब्यूशन, प्रोडक्ट स्पेसिफिकेशन और कस्टमर सर्वे जैसे महत्वपूर्ण गुर सिखाए गए।
पारंपरिक नौकरियों से आगे बढ़कर स्वरोजगार की राह
कार्यक्रम का समापन इस प्रेरणादायी संदेश के साथ हुआ कि उच्च शिक्षा के बाद करियर के विकल्प केवल पारंपरिक नौकरियों तक सीमित नहीं हैं। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. ग्लोरिया पूर्ति द्वारा दिया गया। इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में डीन डॉ. दीपा शरण और डॉ. छगन लाल अग्रवाल का भी सराहनीय सहयोग रहा।



