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Home » Jamshedpur News : सिंहभूम चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने प्रधानमंत्री से बाल न्याय अधिनियम,1986 के समीक्षा करने का किया अनुरोध
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Jamshedpur News : सिंहभूम चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने प्रधानमंत्री से बाल न्याय अधिनियम,1986 के समीक्षा करने का किया अनुरोध

BJNN DeskBy BJNN DeskFebruary 23, 2022No Comments3 Mins Read
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जमशेदपुऱ।

सिंहभूम चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष विजय आंनद मूनका ने बताया की पूर्व बाल अधिनियम,1960 के अनुसार विभिन्न सुरक्षात्मक उपाय किए गए थे, जिसे बाद में किशोर न्याय अधिनियम, 1986 के रूप में संशोधित किया गया था। अधिनियम के अनुसार किशोर वह बच्चा है जिसने 16 वर्ष की आयु पूरी नहीं की है। ऐसे अपराधी किशोर को कारावास की सजा भी नहीं दी जा सकती है। यदि एक किशोर जो 14 वर्ष की आयु प्राप्त कर चुका हो और गंभीर प्रकृति का अपराध करता है, तो किशोर न्यायालय अपराधी किशोर को ऐसे स्थान और तरीके से सुरक्षित अभिरक्षा में रखने का आदेश दे सकता है जो वह ठीक समझे। अधिनियम के अनुसार पुलिस थानों या जेलों में नजरबंदी विशेष रूप से प्रतिबंधित है।

उन्होंने बताया की एक सुनियोजित बाल न्याय प्रणाली चल रही है जिसमें बाल कल्याण बोर्ड, बाल न्यायालय, अवलोकन गृह, बाल गृह आदि शामिल हैं। आपराधिक कानून और प्रक्रिया ने बच्चों को लंबी रियायतें दी हैं जिनमें आपराधिक जिम्मेदारी से उन्मुक्ति शामिल है (भारतीय धारा 82 और 83 दंड संहिता)।

उन्होंने कहा की बाल अपराधियों को सामाजिक जीवन की मुख्यधारा में लाने और उन्हें अच्छे नागरिक बनने के लिए शिक्षित करने के लिए अधिकारियों द्वारा की गई विभिन्न पहलों की सराहना करते हुए हम दृढ़ता से महसूस करते हैं कि 1986 के इस किशोर अधिनियम की कुछ वैध कारणों की समीक्षा की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा की सभी बाल अपराधियों के साथ एक समान व्यवहार एक बुद्धिमानी भरा निर्णय प्रतीत नहीं होता है। उन्होंने एक ठोस उदाहरण देते हुए कहा की अगर 15 साल का लड़का बलात्कार करता है और चूंकि वह कानून की नजर में किशोर है, इसलिए उसे वह सभी सुरक्षा मिलती है जो अधिनियम प्रदान करता है। यदि वह शारीरिक और मानसिक रूप से पर्याप्त परिपक्व है, तो बलात्कार जैसे जघन्य अपराध को करने के लिए उसे परिपक्व वयस्क के रूप में क्यों नहीं माना जाना चाहिए और उसे दी गई सजा वयस्क अपराधियों के लिए कानून के अनुरूप होना चाहिए।
उन्होंने कहा की मोबाइल स्नैचिंग की खबरें प्रतिदिन हर प्रिंट मीडिया में दैनिक आधार पर आसानी से देखी जा सकती हैं। जिन अपराधियों को इन मामलों में गिरफ्तार किया जा सकता था, वे ज्यादातर 14-18 आयु वर्ग के पाए जाते हैं।

उन्होंने माननीय प्रधानमंत्री से अनुरोध किया की अधिनियम से संबंधित आयु की समीक्षा की जाए और आयु को 16 वर्ष से घटाकर 14 वर्ष करने की व्यवस्था की जाए।उन्होंने कहा की एक व्यक्ति को बाल अपराधी के रूप में मानने के लिए आजकल एक चतुर प्रथा बन गई है कि रैकेट में काम करने वाले कई गिरोह अधिनियम के लाभकारी प्रावधानों का अनुचित लाभ उठाने के लिए बच्चों को चोरी, स्नैचिंग, डकैती आदि के लिए उपकरण के रूप में उपयोग करते हैं।

इस अधिनियम का लाभ उठाते हुए बालको का उपयोग छिनतई, चोरी, लूट-पाट, छेडख़ानी, आदि अन्य अपराधो के लिए लगातार किया जा रहा है।

इस पत्र की प्रतिलिपि झारखंड के सभी सांसदो को भी भेजी गयी है।

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