
जमशेदपुर में नई श्रम संहिता (New Labour Code) को लेकर उद्योग जगत को जागरूक करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (SCCI), जमशेदपुर एवं आदित्यपुर स्मॉल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (ASIA) के संयुक्त तत्वावधान में एक विशेष सेमिनार का आयोजन किया गया। यह सेमिनार मंगलवार, 23 दिसंबर 2025 को चैंबर भवन, बिष्टुपुर में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम में जमशेदपुर, आदित्यपुर एवं आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़े उद्योगपतियों, व्यवसायियों, एचआर प्रोफेशनल्स तथा प्रबंधन प्रतिनिधियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।


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EY के विशेषज्ञों ने रखी विस्तृत प्रस्तुति
सेमिनार के मुख्य वक्ता अंतरराष्ट्रीय परामर्श संस्था ईवाई (EY) से जुड़े श्री रवि जायसवाल, डायरेक्टर एवं सुश्री रीमा जलान, सीनियर मैनेजर रहीं। दोनों वक्ताओं ने नई श्रम संहिता के विभिन्न प्रावधानों, अनुपालन ढांचे (Compliance Framework) तथा उद्योगों पर इसके व्यावहारिक प्रभावों को सरल भाषा में समझाया। उन्होंने बताया कि नई श्रम संहिता कार्यस्थल सुधारों की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिसका उद्देश्य श्रम कानूनों को आधुनिक, पारदर्शी और व्यावसायिक जरूरतों के अनुरूप बनाना है।
नियोक्ताओं के लिए प्रमुख लाभ
वक्ताओं ने बताया कि नई श्रम संहिता के तहत 29 पुराने एवं जटिल श्रम कानूनों को समाहित कर चार श्रम कोड बनाए गए हैं। इससे नियोक्ताओं के लिए अनुपालन प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक सरल और एकरूप हो गई है। वेतन, कार्य घंटे, ओवरटाइम और सेवा शर्तों की स्पष्ट परिभाषा से मानव संसाधन प्रबंधन को मजबूती मिलेगी।
डिजिटल रजिस्ट्रेशन, ऑनलाइन रिटर्न फाइलिंग और रिकॉर्ड-कीपिंग की व्यवस्था से कागजी कार्यवाही में कमी आएगी, जिससे प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी। औद्योगिक संबंधों में स्पष्टता आने से श्रमिक और नियोक्ता के बीच विवादों की संभावना कम होगी और उद्योगों को एक स्थिर एवं अनुकूल कारोबारी वातावरण मिलेगा।
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नई श्रम संहिता से जुड़ी चुनौतियां
हालांकि वक्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि नई श्रम संहिता के साथ कुछ चुनौतियां भी सामने आएंगी। वेतन की नई परिभाषा के कारण भविष्य निधि (PF), ग्रेच्युटी और अन्य सामाजिक सुरक्षा योगदान में वृद्धि हो सकती है, जिससे नियोक्ताओं पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा।
प्रारंभिक चरण में एचआर नीतियों, पेरोल संरचना और आंतरिक प्रक्रियाओं में व्यापक बदलाव करने की आवश्यकता होगी, जो समय और संसाधनों की मांग करेगा। विशेष रूप से छोटे एवं मध्यम उद्योगों (MSME) के लिए यह संक्रमणकाल चुनौतीपूर्ण हो सकता है। पर्याप्त प्रशिक्षण और जागरूकता के अभाव में अनुपालन से जुड़े जोखिम भी उत्पन्न हो सकते हैं।
उद्योग संगठनों के विचार
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए सिंहभूम चैंबर के अध्यक्ष मानव केडिया ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार केंद्र सरकार ने 17 अप्रत्यक्ष कर कानूनों को समाप्त कर जीएसटी लागू किया, उसी तरह 29 श्रम कानूनों को समाप्त कर चार श्रम कोड लाना भी एक सराहनीय कदम है। उन्होंने झारखंड सरकार से जल्द नियमावली बनाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि चैंबर उद्योग और श्रमिक हित में अपने सुझाव सरकार को प्रेषित करेगा, ताकि भविष्य में बार-बार संशोधन की आवश्यकता न पड़े।
वहीं आदित्यपुर स्मॉल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष इन्दर अग्रवाल ने कहा कि नए श्रम कानून में अभी और सुधार की आवश्यकता है। यदि इसे वर्तमान प्रारूप में लागू किया गया तो भविष्य में उद्योग और श्रमिक दोनों के लिए समस्याएं बढ़ सकती हैं। उन्होंने सरकार से कानून को और सरल एवं व्यावहारिक बनाने पर विचार करने की अपील की।
प्रश्न-उत्तर सत्र रहा बेहद उपयोगी
सेमिनार के दौरान आयोजित प्रश्न-उत्तर सत्र में प्रतिभागियों ने अपने व्यावहारिक अनुभव, समस्याएं और आशंकाएं साझा कीं। वक्ताओं ने उदाहरणों और केस स्टडी के माध्यम से उनके समाधान प्रस्तुत किए, जिसे उपस्थित सदस्यों ने अत्यंत उपयोगी और ज्ञानवर्धक बताया।
आगे भी होंगे ऐसे कार्यक्रम
एसिया के महासचिव श्री प्रवीण गुटगुटिया ने कहा कि इस तरह के सेमिनार उद्योगों को बदलते श्रम कानूनों के अनुरूप खुद को तैयार करने में अहम भूमिका निभाते हैं। भविष्य में भी एसिया और सिंहभूम चैंबर के संयुक्त तत्वावधान में ऐसे जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
कार्यक्रम में विषय प्रवेश एवं वक्ताओं का परिचय उपाध्यक्ष हर्ष बाकरेवाल ने कराया। मंच संचालन चैंबर के मानद महासचिव पुनीत कांवटिया ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन सचिव बिनोद शर्मा ने किया। कार्यक्रम में चैंबर और एसिया के पदाधिकारी, बड़ी संख्या में व्यवसायी, उद्यमी और प्रोफेशनल्स उपस्थित रहे।



