
जमशेदपुर।
डिजिटल युग में बढ़ती भ्रामक सूचनाओं और फेक न्यूज़ की चुनौती के बीच प्रेस की विश्वसनीयता को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से जिला जनसंपर्क कार्यालय, पूर्वी सिंहभूम द्वारा प्रेस क्लब ऑफ जमशेदपुर के सहयोग से होटल कैनेलाइट में एक विचारोत्तेजक सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार का विषय था— “बढ़ती भ्रामक सूचनाओं के बीच प्रेस की विश्वसनीयता का संरक्षण”।
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भ्रामक खबरों का समाज पर असर
मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता, प्रभात खबर के पूर्व संपादक व प्रख्यात लेखक श्री अनुज सिन्हा ने कहा कि भ्रामक खबरें केवल व्यक्ति विशेष नहीं, बल्कि पूरे समाज और देश को प्रभावित करती हैं। सोशल मीडिया आधारित रिपोर्टिंग यदि बिना तथ्य जांच के की जाए, तो उसके परिणाम गंभीर और घातक हो सकते हैं।
विश्वसनीयता ही पत्रकार की पहचान
श्री सिन्हा ने कहा कि पत्रकार और अखबार की असली पहचान उनकी विश्वसनीयता से होती है। गलती होना अलग बात है, लेकिन जानबूझकर की गई गलती पत्रकारिता के मूल्यों को कमजोर करती है। धैर्य, संयम और तथ्यपरक पत्रकारिता ही भविष्य के लिए आदर्श बनेगी।
पत्रकारिता का नैतिक दायित्व
विशिष्ट अतिथि अपर उपायुक्त श्री भगीरथ प्रसाद ने कहा कि यह मान लेना कि केवल हम ही सही हैं, एक गलत सोच है। पत्रकारिता का एक सैद्धांतिक, सामाजिक और राष्ट्रीय दायित्व होता है, जिसे ईमानदारी से निभाना आवश्यक है।
पाठकों का भरोसा आज भी कायम
हिंदुस्तान के संपादक श्री गणेश मेहता ने कहा कि पाठक आज भी मीडिया पर भरोसा करते हैं। ऐसे में पत्रकारों को समय के साथ खुद को लगातार अपडेट और प्रशिक्षित करते रहना चाहिए।
सोशल मीडिया से बढ़ी चुनौती
दैनिक उदितवाणी के संपादक श्री उदित अग्रवाल ने कहा कि सोशल मीडिया आज भ्रामक सूचनाओं का बड़ा माध्यम बन गया है, जो वास्तविक और जिम्मेदार पत्रकारिता के लिए एक गंभीर चुनौती है।
प्रमाणिक मीडिया की भूमिका
करीम सिटी कॉलेज की मास कम्युनिकेशन विभागाध्यक्ष डॉ. नेहा तिवारी ने कहा कि अखबार और प्रमाणिक मीडिया ही सूचना की अंतिम पुष्टि का स्रोत होते हैं। केवल एआई या सोशल मीडिया पर निर्भर रहना सही नहीं है।
सम्मान और पुस्तक विमोचन
कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ पत्रकारों और उत्कृष्ट कार्य करने वाले पत्रकारों को सम्मानित किया गया। प्रेस क्लब ऑफ जमशेदपुर द्वारा दिवंगत पत्रकारों को मरणोपरांत सम्मान भी प्रदान किया गया।



