
जमशेदपुर: सिंहभूम जिला भोजपुरी साहित्य परिषद द्वारा आगामी 5 जुलाई को शहर में एक बड़ा साहित्यिक महाकुंभ आयोजित किया जा रहा है। गोलमुरी स्थित भोजपुरी भवन में हुई परिषद की एक महत्वपूर्ण बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि इस वर्ष का प्रतिष्ठित ‘सातवां प्रो. राघव आलोक स्मृति सम्मान’ देश के जाने-माने पटकथा लेखक, साहित्यकार और वरिष्ठ पत्रकार कृपाशंकर (सासाराम) को प्रदान किया जाएगा। रविवार को परिषद के अध्यक्ष अरविंद विद्रोही की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस गरिमामय आयोजन की अंतिम रूपरेखा तय की गई।

सिनेमा और साहित्य के दिग्गज कृपाशंकर का होगा नागरिक अभिनंदन
प्रोफेसर राघव आलोक की स्मृति में हर साल दिए जाने वाले इस सम्मान का राष्ट्रीय साहित्य जगत में अपना एक विशिष्ट स्थान है। इस वर्ष के चयनित रचनाकार कृपाशंकर मूल रूप से बिहार के सासाराम के रहने वाले हैं। उन्होंने मुख्यधारा की पत्रकारिता के साथ-साथ कई चर्चित हिंदी फिल्मों और धारावाहिकों के पटकथा लेखन में अपनी अमिट छाप छोड़ी है। भोजपुरी और हिंदी साहित्य में उनके बेमिसाल योगदान को देखते हुए चयन समिति ने सर्वसम्मति से उनके नाम पर मुहर लगाई है। 5 जुलाई को परिषद द्वारा अंगवस्त्र, स्मृति चिन्ह और सम्मान राशि देकर उनका नागरिक अभिनंदन किया जाएगा।
डॉ. अशोक अविचल होंगे मुख्य अतिथि, कथाकार जयनंदन रखेंगे विचार
परिषद के महासचिव डॉ. उदय हयात ने बताया कि 5 जुलाई को होने वाले इस भव्य सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में प्रख्यात विद्वान डॉ. अशोक अविचल उपस्थित रहेंगे। वहीं, हिंदी साहित्य के मशहूर प्रगतिशील कथाकार जयनंदन मुख्य वक्ता के तौर पर विषय प्रवेश कराएंगे। इस आयोजन को ऐतिहासिक बनाने के लिए लौहनगरी जमशेदपुर के तमाम वरिष्ठ कलमकारों, कवियों, रंगकर्मियों और साहित्य प्रेमियों को आमंत्रित किया जा रहा है। परिषद का मानना है कि ऐसे आयोजनों से न सिर्फ स्थानीय रचनाकारों को प्रेरणा मिलती है, बल्कि अपनी मातृभाषा के प्रति युवाओं का जुड़ाव भी मजबूत होता है।
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भोजपुरी भवन में हुई तैयारी बैठक, जुटे कई बुद्धिजीवी
समारोह की रूपरेखा और जिम्मेदारियों का बंटवारा करने के लिए रविवार को भोजपुरी भवन में बुलाई गई इस बैठक में कई जाने-माने चेहरे मौजूद रहे। बैठक में मुख्य रूप से डॉ. उदय हयात, प्रदीप सिंह भोजपुरिया, मसूद खान, चंद्रकांत, मिथलेश तिवारी और रमेश हंसमुख सहित अन्य सदस्यों ने भाग लिया। अंत में अध्यक्ष अरविंद विद्रोही ने शहर के सभी बुद्धिजीवियों से अपील की है कि वे 5 जुलाई को नियत समय पर भोजपुरी भवन पहुंचकर इस साहित्यिक अनुष्ठान को सफल बनाएं।


