
जमशेदपुर.
बिष्टुपुर में चाय दुकान चलाने वाली एक युवती पर गर्म चाय फेंके जाने की घटना के बाद उसके इलाज को लेकर उठे विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है. मानवाधिकार कार्यकर्ता जवाहरलाल शर्मा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि युवती के इलाज में आए खर्च को माफ कराने का श्रेय लेने के लिए शहर के कुछ राजनीतिक और प्रभावशाली लोगों के बीच प्रतिस्पर्धा चल रही है, जबकि वास्तविकता यह है कि इस प्रकार का खर्च कंपनियों की कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) नीति के तहत वहन किया जाता है. उन्होंने कहा कि युवती गंभीर रूप से झुलस गई थी और उसे इलाज के लिए टीएमएच में भर्ती कराया गया. आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण कई लोग उसकी मदद के लिए आगे आए. इसी बीच कुछ नेताओं ने दावा किया कि उन्होंने अस्पताल का बिल माफ करवाया है, जबकि सीएसआर के तहत कंपनियों को सामाजिक दायित्व निभाना कानूनी रूप से अनिवार्य है.
सीएसआर फंड के उपयोग को लेकर उठाए सवाल
जवाहर लाल शर्मा ने कहा कि टाटा स्टील सहित बड़ी कंपनियां अपने शुद्ध लाभ का दो प्रतिशत सीएसआर के तहत खर्च करती हैं. उनका कहना है कि यह किसी का व्यक्तिगत दान नहीं, बल्कि कानूनी प्रावधान के तहत किया जाने वाला व्यय है. उन्होंने कहा कि चैट जीपीटी से मिली जानकारी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 में टाटा स्टील ने लगभग 3,100 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया, जिसके आधार पर बड़ी राशि सीएसआर मद में खर्च की जानी चाहिए.
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि प्रतिदिन केवल एक लाख रुपये भी गरीबों के इलाज के लिए खर्च किए गए होते, तो महीने में 30 लाख रुपये और सालभर में 3 करोड़ 60 लाख रुपये तक जरूरतमंद मरीजों के माफ किए जा सकते थे, जो नहीं किए गए. उन्होंने टेल्को और टिनप्लेट अस्पतालों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इन संस्थानों को भी अपने सीएसआर फंड का उपयोग गरीबों के इलाज के लिए अधिक प्रभावी ढंग से करना चाहिए. पर, शायद ही इन अस्पतालों में किसी जरुरतमंद का बिल माफ हुआ हो..जनप्रतिनिधियों को इसकी पड़ताल करनी चाहिए.
टीएमएच, एमटीएमएच और सीटी स्कैन मशीन का भी किया जिक्र
प्रेस विज्ञप्ति में टीएमएच अस्पताल के सर जहांगीर गांधी ब्लॉक (चार तल्ला)का भी उल्लेख किया गया है. शर्मा ने कहा कि अस्पताल भवन के निर्माण में अनक्लेम्ड मनी का उपयोग किया गया था, जिसे जनता का पैसा माना जाना चाहिए.
उन्होंने एक और महत्वपूर्ण बात कही कि एमटीएमएच कैंसर अस्पताल में लगी सीटी स्कैन मशीन जर्मनी की सीमेंस कंपनी द्वारा इस शर्त पर दी गई थी कि अस्पताल में गरीब और कमजोर वर्ग के 50 प्रतिशत मरीजों का मुफ्त इलाज होगा. हालांकि उनका आरोप है कि वास्तविकता में गरीब मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि टीएमएच में आयुष्मान कार्ड को मान्यता नहीं दिए जाने से गरीब मरीजों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.
जनप्रतिनिधियों से हस्तक्षेप की मांग
जवाहर लाल शर्मा ने शहर के जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि वे राजनीतिक श्रेय लेने की बजाय जनता को राहत पहुंचाने के लिए प्रतिस्पर्धा करें. उन्होंने कहा कि टाटा स्टील, टेल्को, टिन प्लेट और अन्य कंपनियां जमशेदपुर के जल, जंगल और जमीन पर बसी हैं, जो उन्हें नाम मात्र के शुल्क पर दिया गया है. सारे खनिज पदार्थ भी अत्यंत सस्ते दर पर उन्हें उपलब्ध कराया गया था और अब भी यह सुविधा जारी है. इसलिए कंपनियों की सामाजिक जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है.
कोरोना काल में जमशेदपुर की जनता को नहीं मिली सुविधाएं
जवाहरलाल शर्मा ने कोरोना काल का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौरान शहर में कई लोग बेड और वेंटिलेटर की कमी की वजह से अपनी जान से हाथ धो बैठे थे. कंपनी ने यहां कुछ नहीं किया, जबकि मुंबई (जहां कंपनी का हेड ऑफिस है) में जनता को ढेर सारी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई थीं.


