जमशेदपुर.
फ्लैक(फ्री लीगल एड कमेट के संस्थापक प्रेमचंद (प्रेमजी) के पार्थिव शरीर को आज दोपहर को उनके सोनारी स्थित आवास और फिर फ्लैक के कार्यालय (आदर्श सेवा संस्थान, सोनारी) परिसर में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी.
इस मौके पर उनके आवास और आदर्श सेवा संस्थान परिसर का माहौल गमगीन हो गया. आवास के आस-पास रहनेवाले लोगों ने उनके पार्थिव शरीर के नमन किया. वहीं आदर्श सेवा संस्थान परिसर में प्रेमजी के अंतिम दर्शन के लिए काफी संख्या में आम लोग, सामाजिक कार्यकर्ता और अन्य गणमान्य लोग पहुंचे. इस दौरान प्रभा जायसवाल, जवाहरलाल शर्मा, लखी दास, प्रशांत सिंह, सुनील आनंद, मनोज सिंह, संजय मिश्र, अन्नी अमृता और पद्मश्री छुटनी महतो समेत अन्य लोग खास तौर पर उपस्थित हुए.
आनंद मार्ग से जुड़े साथियों ने परंपरा के तहत अंतिम दर्शन के समय मंत्रोच्चार किया. लोगों ने पार्थिव शरीर को पुष्प अर्पित कर अंतिम दर्शन किए. उसके बाद नियमानुसार पार्थिव शरीर को प्रशासन को सौंप दिया गया.
देहदान करने की थी उनकी अंतिम इच्छा
दिवंगत प्रेमजी की अंतिम इच्छा देह दान करने की थी, जिसके संबंध में उन्होंने अपने करीबियों से बातें साझा की थी. इस संबंध में कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार उचित पहल करते हुए उनके करीबियों ने पार्थिव शरीर प्रशासन को सौंप दिया.
पद्मश्री छुटनी देवी नहीं रोक सकीं आंसू
इस मौके पर डायन प्रथा के खिलाफ आवाज उठाने वाली पद्मश्री छुटनी देवी अपने आंसू नहीं रोक सकी. दिवंगत प्रेमचंद ने अपनी संस्था के माध्यम से छुटनी देवी की काफी मदद की और उनको सशक्त बनाया. आगे चलकर छुटनी देवी डायन प्रथा के खिलाफ आवाज उठाकर अन्य महिलाओं को एकजुट करने वाली सशक्त नेतृत्वकर्ता बनकर उभरी.बता दें कि शुक्रवार की सुबह प्रेमचंद (प्रेमजी) का टीएमएच में इलाज के दौरान निधन हो गया था. वे पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे और पिछले दिनों उन्हें टीएमएच में भर्ती कराया गया था.
डायन प्रथा के खिलाफ जीवनपर्यंत लड़ते रहे
डायन प्रथा के खिलाफ प्रेमचंद के नेतृत्व में ‘फ्लैक’ संस्था ने उल्लेखनीय कार्य किया. संस्था के प्रयासों का ही फल था कि बिहार से अलग होने के बाद झारखंड बनने पर झारखंड में भी डायन प्रथा अधिनियम को लागू किया गया. डायन प्रथा के खिलाफ आवाज उठाने वाली पद्मश्री छुटनी देवी और अन्य आवाज उठानेवाली महिलाओं को संस्था ने काफी मदद की और उन सबको जोड़कर लगातार ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अभियान चलाया. उन्होंने अपना पूरा जीवन इसमें लगा दिया.
पांच लोगों ने मिलकर डाली थी संस्था की नींव
प्रेमचंद, जवाहरलाल शर्मा, अंजलि बोस और जायसवाल जी समेत पांच लोगों ने मिलकर ‘फ्लैक’ संस्था की स्थापना की. जमशेदपुर ने एक अनमोल सामाजिक कार्यकर्ता को खो दिया है. उनके निधन से ऐसा शून्य पैदा हो गया जिसे भरना मुश्किल है. करीबी और मीडियाकर्मी उन्हें प्यार से प्रेमजी कहते थे.




