जमशेदपुर।
कुपोषण (Malnutrition) के खिलाफ चलाए जा रहे राष्ट्रीय अभियान के तहत टाटानगर रेल अस्पताल (Tatanagar Railway Hospital) में ‘पोषण पखवाड़ा’ का आयोजन किया गया। इस जागरूकता अभियान का मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और बच्चों के स्वास्थ्य और उनके बेहतर पोषण के प्रति लोगों को जागरूक करना है। यह विशेष अभियान 23 अप्रैल तक चलेगा।
गर्भावस्था के पहले दिन से ही पोषण पर दें विशेष ध्यान
कार्यक्रम के दौरान मंच का सफल संचालन रेल अस्पताल के वरिष्ठ मंडल चिकित्सा पदाधिकारी (Sr. DMO) डॉक्टर पॉलीटारगेन ने किया। उन्होंने गर्भवती महिलाओं, माताओं और बच्चों के बेहतर पोषण और स्वास्थ्य को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं।
उन्होंने जागरूक करते हुए कहा कि एक गर्भवती महिला को गर्भधारण के पहले दिन से ही अपने खान-पान और पोषण के प्रति विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। इसके साथ ही, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि प्रसव के बाद शिशु के स्वस्थ विकास के लिए उसे शुरुआती छह महीने तक अनिवार्य रूप से केवल मां का दूध ही पिलाना चाहिए।
6 वर्ष तक होता है बच्चे के मस्तिष्क का 85% विकास
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे रेल अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) डॉ. गुटलू मुर्मू ने अभियान के लक्ष्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह ‘पोषण पखवाड़ा’ 23 अप्रैल तक चलेगा, जिसके तहत अस्पताल में चिकित्सा ले रहीं गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और बच्चों को लगातार पोषण के प्रति जागरूक किया जाएगा।
डॉ. मुर्मू ने एक महत्वपूर्ण चिकित्सीय तथ्य साझा करते हुए बताया कि जन्म से लेकर 6 वर्ष की आयु तक बच्चे के मस्तिष्क का लगभग 85 प्रतिशत विकास हो जाता है। इसलिए, इस उम्र तक बच्चों के सही पोषण और स्वास्थ्य का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। उचित पोषण देकर ही बच्चों को कुपोषण जैसी गंभीर समस्या से बचाया जा सकता है और उन्हें एक स्वस्थ भविष्य दिया जा सकता है।
अभियान में सिविल डिफेंस और अस्पताल कर्मियों की रही अहम भागीदारी
कुपोषण के खिलाफ चलाए जा रहे इस राष्ट्रीय जागरूकता कार्यक्रम में रेल सिविल डिफेंस (Civil Defense) ने भी अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की है। रेलवे सिविल डिफेंस इंस्पेक्टर ने कहा कि उनकी टीम चिकित्सकों के साथ मिलकर इस जागरूकता अभियान को व्यापक स्तर पर सफल बनाने के लिए कार्य करेगी।
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में रेल अस्पताल के चिकित्सक, नर्स, ड्रेसर, और लिपिक कर्मचारीगण के साथ-साथ चिकित्सा ले रहीं गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली माताएं, बच्चे और बड़ी संख्या में रेलकर्मी उपस्थित रहे।





