
जमशेदपुर: सोना देवी विश्वविद्यालय (SDU) के विवेकानन्द ऑडिटोरियम में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस (National Technology Day) के उपलक्ष्य में एक भव्य और ज्ञानवर्धक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह विशेष आयोजन ‘एसडीयू स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी’ और ‘एसडीयू स्कूल ऑफ आईटी एंड कंप्यूटर साइंस’ के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों को विज्ञान, तकनीक और अनुसंधान के क्षेत्र में नवाचार के लिए प्रेरित करना था।
असफलता सफलता की सीढ़ी है: कुलाधिपति प्रभाकर सिंह
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सोना देवी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रभाकर सिंह ने फैकल्टी और विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि जीवन में सफल होने के लिए असफल होना भी जरूरी है, क्योंकि असफलताएं ही हमें बेहतर करने की सीख देती हैं। उन्होंने समाज की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नए प्रोडक्ट विकसित करने पर जोर दिया।
डिजिटलीकरण के उदाहरणों से प्रोडक्ट का अर्थ समझाते हुए उन्होंने युवाओं को विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में शोध और नवाचार (Innovation) के लिए प्रेरित किया। कुलाधिपति ने ‘विकसित भारत 2047’ के विजन में प्रौद्योगिकी की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वक्तव्य को दोहराते हुए कहा कि ‘भारत का भविष्य युवा अनुसंधानकर्ताओं द्वारा ही गढ़ा जाएगा’। साथ ही, उन्होंने डीप टेक स्टार्टअप्स का महत्व बताते हुए तकनीक के माध्यम से वैश्विक समस्याओं को हल करने का आह्वान किया।
चंद्रयान-3 और कोवैक्सिन तकनीक की बड़ी मिसाल
विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. नित नयना ने विज्ञान और तकनीक के महत्व को स्पष्ट करने के लिए कई ज्वलंत उदाहरण दिए। उन्होंने रेलवे के चिनाब ब्रिज, इसरो (ISRO) द्वारा सफलतापूर्वक प्रक्षेपित चंद्रयान-III और भारत बायोटेक द्वारा निर्मित कोरोना वैक्सीन (Covaxin) की चर्चा करते हुए बताया कि कैसे भारतीय नवाचार आज पूरी दुनिया में डंका बजा रहा है।
एसडीयू स्कूल ऑफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की विभागाध्यक्ष पूजा तिवारी ने बताया कि 11 मई 1999 को हुए सफल परमाणु परीक्षण के बाद से ही हर साल यह दिवस देश के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के सम्मान में मनाया जाता है।
READ MORE :PM Visit Somnath Temple 75th Anniversary :प्रधानमंत्री ने सोमनाथ मंदिर का दौरा किया,प्रधानमंत्री ने इसके पुनर्निर्माण की 75वीं वर्षगांठ को भारत की सभ्यतागत यात्रा में मील का पत्थर बताया
क्वांटम कंप्यूटिंग, एआई और एग्रोटेक पर मंथन
कार्यक्रम में तकनीक के आधुनिक स्वरूपों पर भी गहन चर्चा हुई:
अनल बेरा (सहायक प्राध्यापक, CSE): क्वांटम कंप्यूटिंग के भविष्य और संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए।
पतोत्रि माली (सहायक प्राध्यापक, एग्रीकल्चर साइंस): कृषि क्षेत्र में तकनीक की उपयोगिता को दर्शाते हुए एग्रोटेक (Agrotech) के बारे में जानकारी दी।
मानव बेरा (बीटेक सीएसई छात्र): पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के जरिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ‘विकसित भारत 2047’ पर शानदार प्रस्तुति दी।
जया कुमारी (बीसीए छात्रा): एआई (AI) और ऑटोमेशन के बढ़ते प्रभाव पर पीपीटी के माध्यम से अपनी बात रखी।
संजना मुंडा (डिप्लोमा छात्रा, इलेक्ट्रिकल): स्पष्ट किया कि तकनीक भले ही शक्तिशाली है, लेकिन मानव मस्तिष्क उससे कहीं अधिक शक्तिशाली है।
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक रूप से दीप प्रज्वलन के साथ हुआ और समापन राष्ट्रगान से किया गया। अंत में डिपार्टमेंट ऑफ मैनेजमेंट की विभागाध्यक्ष मोनिका सिंह ने सभी अतिथियों, प्राध्यापकों और छात्रों का धन्यवाद ज्ञापन किया।



