जमशेदपुर।
मानगो नगर निगम (Mango Municipal Corporation) चुनाव में एक बड़ा राजनीतिक और कानूनी भूचाल आ गया है। 27 फरवरी 2026 को घोषित हुए मानगो नगर निगम के मेयर पद के चुनाव परिणाम को अब सीधे न्यायालय में चुनौती दी गई है। मानगो नगर निगम की मेयर पद की प्रत्याशी रहीं संध्या सिंह ने माननीय व्यवहार न्यायालय, कनिष्ठ कोटि-1, जमशेदपुर के समक्ष एक अहम निर्वाचन याचिका दायर कर नवनिर्वाचित मेयर सुधा गुप्ता की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इस याचिका के बाद शहर के राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
निवास प्रमाण पत्र और मतदाता सूची में ‘हेरफेर’ का गंभीर आरोप
याचिकाकर्ता और पूर्व मेयर प्रत्याशी संध्या सिंह द्वारा दायर की गई निर्वाचन याचिका संख्या 33/2026 में मेयर सुधा गुप्ता की उम्मीदवारी और उनकी चुनाव लड़ने की पात्रता पर सीधे तौर पर कई गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। झारखंड नगरपालिका अधिनियम, 2011 की धारा 580 और 582 के तहत दायर इस याचिका में स्पष्ट रूप से आरोप लगाया गया है कि नवनिर्वाचित मेयर ने चुनाव लड़ने की अर्हता प्राप्त करने के लिए अपने निवास स्थान से जुड़े तथ्यों में भारी अनियमितताएं और फर्जीवाड़ा किया है।
याचिका के अनुसार, सुधा गुप्ता पहले जमशेदपुर के कदमा क्षेत्र की पंजीकृत मतदाता थीं। आरोप है कि नगर निगम चुनाव से ठीक पहले उनका नाम अत्यंत संदिग्ध परिस्थितियों में मानगो क्षेत्र की मतदाता सूची में जोड़ दिया गया, जबकि वास्तविकता में उनके निवास स्थान में कोई वास्तविक परिवर्तन नहीं हुआ था।
रिटर्निंग ऑफिसर की कार्यशैली पर उठे सवाल
याचिका में केवल प्रत्याशी पर ही नहीं, बल्कि पूरी निर्वाचन प्रक्रिया की खामियों को भी उजागर किया गया है। यह दावा किया गया है कि मानगो की मतदाता सूची में यह नामांतरण पूरी तरह से कृत्रिम और योजनाबद्ध तरीके से महज चुनाव लड़ने की पात्रता हासिल करने के लिए किया गया। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि संबंधित रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा भी नामांकन पत्रों की उचित और गहन जांच नहीं की गई। इसे पारदर्शी निर्वाचन प्रणाली और जनता के विश्वास के साथ एक बड़े छल के रूप में देखा जा रहा है।
चुनाव आयोग का निर्देश और 15 मई को कोर्ट में पेशी
इस मामले को लेकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाने से पहले, याचिकाकर्ता के अधिवक्ता के.एम. सिंह ने रिटर्निंग ऑफिसर, पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त और झारखंड राज्य निर्वाचन आयोग को लिखित रूप से शिकायत दर्ज कराई थी। इसके जवाब में, राज्य निर्वाचन आयोग (झारखंड) ने 30 मार्च 2026 को जारी अपने पत्रांक संख्या 934 के माध्यम से यह निर्देश दिया कि झारखंड नगरपालिका अधिनियम की धारा 580 के तहत इस मामले को सक्षम न्यायालय में निर्वाचन याचिका के रूप में उठाया जा सकता है।
इसी आधार पर न्यायालय ने याचिका को स्वीकार कर लिया है और सभी प्रतिवादियों को आगामी 15 मई 2026 को अदालत में उपस्थित होकर अपना लिखित पक्ष रखने का सख्त निर्देश जारी किया है।
चुनाव रद्द करने और विस्तृत जांच की जोरदार मांग
याचिकाकर्ता संध्या सिंह ने माननीय न्यायालय से न्याय की गुहार लगाते हुए कई प्रमुख मांगें रखी हैं। उन्होंने मांग की है कि सुधा गुप्ता के निर्वाचन को पूरी तरह से शून्य और अवैध घोषित किया जाए तथा 27 फरवरी 2026 के चुनाव परिणाम को तत्काल निरस्त किया जाए। साथ ही, इस पूरे मामले की एक विस्तृत और निष्पक्ष जांच कराई जाए।
एक होटल मे आयोजित प्रेस वार्ता में संध्या सिंह ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव ही स्वस्थ लोकतंत्र की असली ताकत और आधारशिला हैं। नियम व शर्तों को ताक पर रखकर चुनाव जीतना कानून का उल्लंघन होने के साथ-साथ जनता के विश्वास के साथ भी बड़ा धोखा है। उन्होंने न्यायपालिका पर पूर्ण भरोसा जताते हुए कहा कि सत्य को सामने लाने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखने के लिए ही यह कदम उठाया गया है।





