/जमशेदपुर: शिरोमणि शहीद बाबा जीवन सिंह विद्वत एवं भलाई ट्रस्ट के चेयरमैन और विख्यात सिख इतिहासकार जसवंत सिंह के अंतिम अरदास में देशभर से सिख संगत और विभिन्न जत्थेबंदियों का हुजूम उमड़ा। 20 अप्रैल 2026 को चंडीगढ़ के एक अस्पताल में बीमारी के बाद उनका निधन हो गया था। उनके अंतिम अरदास कार्यक्रम में झारखंड से रंगरेटा महासभा के प्रधान और भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के जिला अध्यक्ष मनजीत सिंह गिल विशेष रूप से शामिल हुए।
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“जसवंत सिंह जैसा कौम का हीरा सदियों में एक बार आता है” — मनजीत सिंह गिल
श्रद्धांजलि संबोधन के दौरान मनजीत सिंह गिल ने जसवंत सिंह के योगदान को याद करते हुए उन्हें ‘कौम का हीरा’ बताया। उन्होंने कहा कि जिस तरह जसवंत सिंह ने अपनी कलम और अथक मेहनत के बल पर सोई हुई कौम को जगाया और बाबा जीवन सिंह जी के इतिहास को जन-जन तक पहुँचाया, उसके लिए पूरी कौम हमेशा उनकी ऋणी रहेगी। गिल ने जोर देकर कहा कि जसवंत सिंह के अधूरे कार्यों को पूरा करना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
सिख इतिहास और साहित्य में अतुलनीय योगदान
इतिहासकार जसवंत सिंह की पकड़ पूरे देश की सिख संगत में थी। उन्होंने सिख इतिहास के गौरव को पुनर्स्थापित करने के लिए हजारों की संख्या में पुस्तकें बांटीं। विशेषकर झारखंड में भी उन्होंने सिखों के बीच इतिहास की जागरूकता फैलाने के लिए व्यापक काम किया था। उनके निधन को सिख विद्वता और इतिहास लेखन के क्षेत्र में एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।
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देशभर से उमड़ी संगत और जत्थेबंदियां
अंतिम अरदास में न केवल पंजाब बल्कि देश के कोने-कोने से उनके चाहने वाले और विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि पहुँचे थे। पंजाब की कई प्रमुख धार्मिक और सामाजिक जत्थेबंदियों ने भी कार्यक्रम में शिरकत कर महान इतिहासकार को अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए।



