
जमशेदपुर: लौहनगरी जमशेदपुर ‘हरे रामा-हरे कृष्णा’ के महामंत्र और शंखध्वनि से गूंज उठी है। अवसर था ज्येष्ठ पूर्णिमा के पावन पर्व पर इस्कॉन जमशेदपुर द्वारा आयोजित ‘देव स्नान महोत्सव’ का। धालभूम क्लब में आयोजित इस भव्य आध्यात्मिक कार्यक्रम में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा का 108 पवित्र कलशों से महास्नान कराया गया। इस महास्नान के साथ ही शहर में आषाढ़ मास की विश्वविख्यात रथयात्रा का काउंटडाउन आधिकारिक तौर पर शुरू हो चुका है।

प्रकृति और आयुर्वेद का संगम रहा दिव्य अभिषेक
देव स्नान महोत्सव में महाप्रभु का राजसी स्नान केवल सादे जल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें आयुर्वेद और प्राकृतिक तत्वों का अद्भुत समन्वय देखने को मिला। भीषण गर्मी में भगवान को शीतलता प्रदान करने और औषधीय लाभ के लिए 108 कलशों में विशेष द्रव्य तैयार किए गए थे। इनमें पवित्र गंगाजल, पंचामृत (दूध, दही, घी, मधु और शक्कर), चंदन व अश्वगंधा का सुगंधित लेप, डाब (नारियल) का जल और विभिन्न प्रकार के ताजे फलों के रस शामिल थे। मृदंग की थाप और हरिनाम संकीर्तन के बीच जब यह दिव्य अभिषेक हुआ, तो पूरा परिसर भक्ति के सागर में सराबोर हो गया।
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लगा 56 भोग, अब 15 दिनों के ‘अनवसर’ में महाप्रभु
भव्य स्नान के पश्चात महाप्रभु को श्रद्धापूर्वक 56 प्रकार के पारंपरिक व्यंजनों का महाभोग अर्पित किया गया। सदियों पुरानी जगन्नाथ परंपरा के अनुसार, ज्येष्ठ पूर्णिमा पर अत्यधिक स्नान करने के कारण महाप्रभु ‘अस्वस्थ’ हो जाते हैं। इसी धार्मिक मान्यता का पालन करते हुए स्नान और भोग के तुरंत बाद भगवान जगन्नाथ 15 दिनों के लिए ‘एकांतवास’ (जिसे शास्त्रोक्त भाषा में ‘अनवसर’ कहा जाता है) में चले गए हैं। इन 15 दिनों तक मंदिर के पट दर्शनार्थ बंद रहेंगे और महाप्रभु को केवल जड़ी-बूटियों का काढ़ा अर्पित किया जाएगा। 15 दिनों के बाद ‘नेत्रोत्सव’ के दिन भगवान पुनः स्वस्थ होकर अपने नव-यौवन रूप में भक्तों को दर्शन देंगे।
आयोजन को सफल बनाने में जुटे रहे श्रद्धालु
धालभूम क्लब में हुए इस भव्य महोत्सव को सफल बनाने में इस्कॉन जमशेदपुर के कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम में मुख्य रूप से इस्कॉन जमशेदपुर के प्रमुख पद्मनाभ जगन्नाथ दास, भवानी शंकर गुप्ता, सन्नी संघी, शेखर पर्वत, सुमित अग्रवाल, राजेश भगत, नीरज तिवारी, तन्नू, यश दुर्गे, पवन अग्रवाल और महावीर शर्मा सहित भारी संख्या में कृष्ण भक्त उपस्थित थे।



