जमशेदपुर । अंतर्राष्ट्रीय मैथिली परिषद (जमशेदपुर एवं सरायकेला खरसावां शाखा) के संयुक्त तत्वावधान में मिथिला का नववर्ष और पर्यावरण संरक्षण का महान पर्व ‘जुड़ि शीतल’ बेहद हर्षोल्लास और समारोह पूर्वक मनाया गया। इस भव्य कार्यक्रम में जहां एक ओर अपनी माटी और संस्कृति से जुड़े रहने का संदेश दिया गया, वहीं दूसरी ओर झारखंड की नियोजन नीति में मैथिली भाषा को स्थान न मिलने पर समाज के प्रबुद्ध जनों ने गहरी चिंता और निराशा व्यक्त की।
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प्रकृति और माटी से जुड़ाव का पर्व है जुड़ि शीतल
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित आरक्षी उपाधीक्षक (DSP) सुनील चौधरी ने अपने संबोधन में ‘जुड़ि शीतल’ के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पर्यावरण एवं जल संरक्षण का यह उत्कृष्ट पर्व हमें सीधे हमारी मिट्टी से जोड़ता है। यह पर्व यह संदेश देता है कि हमें केवल मनुष्यों को ही नहीं, बल्कि प्रकृति, वृक्षों और सरोवरों को भी जीवंत और सुरक्षित रखने की जरूरत है।
अंतर्राष्ट्रीय मैथिली परिषद के केन्द्रीय अध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार झा ‘अविचल’ ने कहा कि मिथिला का नववर्ष सभी मैथिली भाषियों को संकल्प लेने और आत्म-विश्लेषण करने का एक शानदार अवसर उपलब्ध कराता है। कार्यक्रम के प्रारंभ में स्वागत भाषण अंतर्राष्ट्रीय मैथिली परिषद के अध्यक्ष अशोक कुमार लाल दास ने दिया।
नियोजन नीति में मैथिली की अनदेखी दुर्भाग्यपूर्ण
इस समारोह में ‘मिथिलाक नववर्ष आ झारखण्ड में मैथिली क सम्मान’ विषय पर एक गंभीर विचार गोष्ठी का भी आयोजन किया गया। गोष्ठी में सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि झारखंड राज्य की नियोजन नीति में मैथिली भाषा को उचित स्थान न मिलना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
समारोह में अतिथि के रूप में भोजपुरी साहित्य परिषद के अरविंद विद्रोही, मैथिली साहित्यकार परिषद के महासचिव डॉ. रवींद्र कुमार चौधरी, वाणिज्यिक प्रकोष्ठ के संयोजक कृष्ण मुरारी झा, अंतर्राष्ट्रीय मैथिली परिषद झारखंड के सचिव पंकज कुमार झा और सरायकेला खरसावां शाखा के अध्यक्ष हंसराज जैन ने भी अपने-अपने विचार प्रमुखता से रखे।
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कवि सम्मेलन ने बांधा समां, गुदगुदाती कविताओं पर लगे ठहाके
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। पंडित विपिन कुमार झा ने स्वस्तिवाचन किया, जिसके बाद जमशेदपुर की मैथिल मिथिलानियों ने सस्वर भगवती वंदना प्रस्तुत की और अतिथियों का स्वागत गीत गाया। सभी अतिथियों को मिथिला की पारंपरिक पाग, दोपटा और बुके देकर सम्मानित किया गया।
विचार गोष्ठी के बाद एक शानदार कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ, जिसकी अध्यक्षता डॉ. अशोक कुमार झा ‘अविचल’ ने की। इस कवि सम्मेलन में शिव कुमार झा टिल्लू, अशोक पाठक स्नेही, नूतन झा, गोपाल चन्द्र झा, अन्नपूर्णा झा, विवेकानंद झा, रुपम झा, पिंकी अमर झा, पूनम ठाकुर, ममता कर्ण और विभा कुमारी ने अपनी बेहतरीन कविताओं से दर्शकों को खूब हंसाया और तालियां बटोरीं।
मंच का सफल संचालन सरायकेला खरसावां शाखा के महासचिव राजीव रंजन ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन जमशेदपुर शाखा के महासचिव विपिन कुमार झा ने किया।
पारंपरिक व्यंजनों ‘दालपूरी और आम की चटनी’ का उठाया लुत्फ
किसी भी मिथिला आयोजन की पूर्णता वहां के स्वादिष्ट व्यंजनों के बिना अधूरी है। समारोह के अंत में सभी आगंतुकों के लिए ‘जुड़ि शीतल’ पर्व के मुख्य पारंपरिक पकवानों की व्यवस्था की गई थी। जमशेदपुर के विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारियों एवं सैकड़ों की संख्या में उपस्थित मैथिली भाषियों ने दालपूरी, आम की चटनी, बड़ी और खीर जैसे लजीज मिथिला व्यंजनों का जमकर लुत्फ उठाया।






