
जमशेदपुऱ: पंचगव्य चिकित्सा के बढ़ते प्रभाव के बीच मोहरदा क्षेत्र स्थित भवानी कॉलोनी, बारीडीह में “जीवन धारा पंचगव्य चिकित्सा सेवा केंद्र” का विधिवत उद्घाटन किया गया। इस केंद्र की स्थापना डॉ. बालेश्वर प्रसाद द्वारा की गई है। उद्घाटन समारोह में पंचगव्य विद्यापीठ, चेन्नई के संस्थापक निरंजन भाई वर्मा मुख्य रूप से उपस्थित रहे और उन्होंने फीता काटकर केंद्र का शुभारंभ किया।

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गौ सेवा का महत्व
अपने संबोधन में आचार्य निरंजन भाई वर्मा ने कहा कि गौ सेवा से बढ़कर कोई सेवा नहीं है। उन्होंने कहा कि गाय मानव जीवन को अमूल्य उपहार देती है—दूध, गोबर और गौमूत्र जैसे तत्व स्वास्थ्य और कृषि दोनों क्षेत्रों में उपयोगी माने जाते हैं। उनका दावा था कि यदि इन पंचगव्य तत्वों को वैज्ञानिक तरीके से जीवन में शामिल किया जाए तो कई बीमारियों से बचाव संभव है।
उन्होंने यह भी कहा कि जहां गौ माता का निवास होता है, वहां वातावरण में ऑक्सीजन स्तर बढ़ने की बात शोधों में सामने आई है। साथ ही, उन्होंने बताया कि दूध, गोबर और गौमूत्र का जितना अधिक प्रसंस्करण किया जाएगा, उसकी गुणवत्ता और उपयोगिता उतनी ही बढ़ती है।
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जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि जमशेदपुर पूर्वी की विधायक पूर्णिमा साहू रहीं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि पंचगव्य चिकित्सा को लेकर जो सकारात्मक विचार सामने आए हैं, उन्हें राज्य स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए सरकार के समक्ष रखा जाएगा।
विशिष्ट अतिथियों में बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के सीईओ एस. जायसवाल, झारखंड सरकार के एडिशनल सेक्रेटरी रंजीत सिन्हा तथा डॉ. मदन कुशवाहा शामिल थे। सभी वक्ताओं ने पंचगव्य आधारित चिकित्सा और जैविक जीवनशैली को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
समाज की सहभागिता
कार्यक्रम में समाजसेवी श्रीकांत देव, राधे कृष्णा पोद्दार, सुबोध कुमार शर्मा, लक्ष्मण सिंह सहित बड़ी संख्या में महिलाएं और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। उपस्थित लोगों ने केंद्र के माध्यम से प्राकृतिक चिकित्सा और गौ आधारित उत्पादों के प्रसार की उम्मीद जताई।
समारोह के अंत में आचार्य निरंजन भाई वर्मा ने कहा कि पंचगव्य चिकित्सा न केवल स्वास्थ्य बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक सकारात्मक कदम है। उन्होंने लोगों से गौ संरक्षण और जैविक जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया।



