
जमशेदपुर। जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने नगरपालिका इकाइयों की कार्यप्रणाली पर असंतोष जाहिर करते हुए कहा है कि इनमें संस्थागत लेखाजोखा और कृत एवं शेष कार्यों को पूरा करने के लिए प्राथमिकता निर्धारण का घोर अभाव है। बजट उपलब्धता के अनुरूप कार्य योजनाओं के निष्पादन और योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता शून्य के बराबर है।


नगरपालिका इकाइयों की कार्यप्रणाली पर सरयू राय ने जताई गहरी चिंता
नगरपालिका इकाइयों की कार्यप्रणाली पर सरयू राय ने जताई गहरी चिंता
संस्थागत लेखाजोखा, प्राथमिकता निर्धारण और पारदर्शिता का घोर अभावः सरयू राय
उपायुक्त से ठोस सुधारात्मक पहल करने का अनुरोध-बजट के अनुरूप कार्य योजनाओं के निष्पादन और क्रियान्वयन में पारदर्शिता शून्य के बराबर
-कृत एवं शेष कार्यों का वार्षिक लेखाजोखा नहीं होने से नए पदाधिकारियों को नहीं मिलती पूरी जानकारी
-निविदा, संवेदक चयन, एग्रीमेंट और समय सीमा में काम पूरा कराने में नगरपालिका निकाय तत्पर नहीं
-सड़क, नाली, जलापूर्ति, साफ-सफाई और जल-मल निकासी की योजनाएं साल दर साल उलझी रहती हैं
-गत 8 जुलाई की बैठक में सहमति के बावजूद डेढ़ माह बाद भी सुधार की दिशा में पहल शून्य
जमशेदपुर।
पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त को लिखे पत्र में सरयू राय ने कहा कि स्थानीय नगरपालिका इकाइयों की कार्यप्रणाली में ठोस सुधारात्मक पहल करने की जरूरत है। जमशेदपुर की नगरपालिका इकाइयों को एक संस्थान के रूप में काम करना चाहिए और प्रत्येक वर्ष किए गए कार्यों का लेखाजोखा संधारित होना चाहिए, ताकि पदाधिकारियों के स्थानांतरण के बाद नए आने वाले पदाधिकारी को कृत और शेष कार्यों की एक नजर में जानकारी मिल सके।
सरयू राय ने लिखा है कि निविदा निष्पादन, संवेदक चयन, संवेदकों के साथ एग्रीमेंट, कार्यादेश देने और समय सीमा में काम पूरा कराने के मामले में नगरपालिका निकाय तत्पर नहीं हैं। इसका खामियाजा जनता भुगत रही है। जनता, कार्य क्षेत्र, विधायक, नगरपालिका पदाधिकारी, उप विकास आयुक्त और उपायुक्त स्तर तक संचिकाओं के मकड़जाल में विकास एवं जनसुविधा योजनाएं दम तोड़ देती हैं। आधिकारिक रूप से काम पूरा घोषित होने तक कृत कार्यों की फिर मरम्मत की जरूरत महसूस होने लगती है।
उपायुक्त को लिखे पत्र में श्री राय ने याद दिलाया कि उनके 8 जुलाई 2026 के आग्रह पर उन्होंने मानगो नगर निगम के अपर नगर आयुक्त, जेएनएसी के नगर आयुक्त और टाटा स्टील यूआईएसएल के महाप्रबंधक की बैठक अपने कार्यालय कक्ष में बुलाई थी। बैठक में वह भी (श्री राय) शामिल थे। बैठक में उन्होंने नगरपालिका इकाइयों को संस्थान की तरह काम करने और प्रत्येक वर्ष के कार्यों का लेखा-जोखा रखने की आवश्यकता बतायी थी।
पत्र में सरयू राय ने लिखा है कि सड़क, गली, नाली, जलापूर्ति, साफ-सफाई, जल-मल निकासी और सामुदायिक भवन जैसी जनसुविधाओं के निर्माण के तिलिस्म में नगरपालिका इकाइयां और जन आकांक्षाएं साल दर साल लगी रहती हैं, फिर भी असंतुष्ट रहती हैं। यही हाल जिला योजना, नगर विकास योजना और सांसद-विधायक निधि योजना का भी है।
सरयू राय ने कहा कि कृत एवं शेष कार्यों का लेखाजोखा, निरंतर चलने वाली जनसुविधाओं के निर्माण, मरम्मत एवं देखरेख तथा नगरपालिका क्षेत्र के विस्तार एवं संस्थागत विकास के लिए योजनाओं के सूत्रण, निधि व्यवस्था, स्वीकृति और क्रियान्वयन का अलग-अलग संस्थात्मक ढांचा होना चाहिए। इनमें घालमेल नहीं होना चाहिए।
उन्होंने पत्र में लिखा कि जब वह जमशेदपुर पूर्वी क्षेत्र का विधायक चुने गये थे, तब से ही वह क्षेत्र विकास की नाला आधारित योजना पर काम करने पर जोर देते रहे हैं। जाड़ा, गर्मी के सामान्य दिनों और बरसात के विशेष दिनों में घरों से निकलने वाला पानी शीघ्रता एवं तत्परता से बड़े नालों तक पहुंचाया जाए और जलजमाव न हो, इसके लिए दो बड़े नालों के बीच के क्षेत्रों में जनसुविधा एवं क्षेत्र विकास योजनाओं का सूत्रण और क्रियान्वयन होना चाहिए।
पत्र में श्री राय ने लिखा है कि यह तभी संभव है जब नगरपालिका निकाय सक्षम संस्था के रूप में काम करें और दक्ष एवं प्रवीण मानव बल की सहायता लें। बैठक में सभी इस पर सहमत हुए थे, लेकिन डेढ़ माह बीत जाने के बाद भी इस दिशा में पहल शून्य है। पुरानी आदतों के घेरे में चक्करघिन्नी की तरह घूमते रहने की कार्यप्रणाली बदलने की मानसिकता न सोच के स्तर पर दिख रही है और न क्रियाशीलता के स्तर पर। उन्होंने उपायुक्त से इस दिशा में ठोस सुधारात्मक पहल करने के लिए स्थानीय नगरपालिका निकायों का प्रबोधन करने का अनुरोध किया।



