
जमशेदपुर।
शहर के Sakchi Gurudwara में रविवार को सिखों के पारंपरिक पर्व Hola Mohalla के अवसर पर बच्चों के लिए विशेष खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में नन्हे-मुन्ने बच्चों ने उत्साह के साथ भाग लेकर सभी का मन मोह लिया। खेलों के साथ-साथ बच्चों को सिख इतिहास और परंपराओं की जानकारी भी दी गई, जिससे यह आयोजन शिक्षा और मनोरंजन का सुंदर संगम बन गया।
कार्यक्रम का आयोजन गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी साकची द्वारा Mata Sahib Kaur Gatka Academy के सहयोग से किया गया। यह एक दिवसीय कार्यक्रम साकची गुरुद्वारा के मॉडर्न स्कूल परिसर में आयोजित हुआ, जिसमें सुबह 7:30 बजे से लेकर शाम 4:00 बजे तक विभिन्न गतिविधियाँ संचालित की गईं।
210 बच्चों ने लिया उत्साहपूर्वक भाग
इस विशेष आयोजन में कोल्हान क्षेत्र के अलग-अलग इलाकों से लगभग 210 बच्चों ने हिस्सा लिया। बच्चों के लिए कई रोचक खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, जिनमें फन गेम्स, क्विज प्रतियोगिता और सिख इतिहास से जुड़ी प्रश्नोत्तरी शामिल थी।
प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को आकर्षक उपहार और सरप्राइज गिफ्ट देकर सम्मानित किया गया। आयोजकों की ओर से यह भी बताया गया कि प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं रखा गया था, ताकि अधिक से अधिक बच्चे इसमें शामिल हो सकें।
बच्चों को सिख इतिहास से जोड़ने की पहल
पुरस्कार वितरण समारोह गुरुद्वारा के दरबार साहिब में आयोजित किया गया। इस मौके पर गुरुद्वारा के प्रधान सरदार निशान सिंह ने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि बच्चों का मन गीली मिट्टी की तरह होता है, उन्हें जिस दिशा में ढाला जाता है वे उसी मार्ग पर आगे बढ़ते हैं।
उन्होंने कहा कि बच्चों को बचपन से ही गुरु घर और सिख परंपराओं से जोड़ना जरूरी है, ताकि वे अपने इतिहास और संस्कृति को समझ सकें। गुरुद्वारा कमिटी के महासचिव परमजीत सिंह काले ने भी अपने संबोधन में कहा कि होला महल्ला केवल एक पर्व नहीं बल्कि साहस, सेवा और शौर्य का प्रतीक है।
आयोजन को सफल बनाने में कई लोगों का सहयोग
कार्यक्रम की सफलता में बीबी हरप्रीत कौर, बीबी अवनीत कौर, बीबी पमित कौर और बीबी तवलीन कौर का विशेष योगदान रहा। इसके अलावा साकची कमिटी की ओर से राज कौर, बीबी मनजीत कौर, सतनाम सिंह सिद्धू, जसबीर सिंह गांधी, सतनाम सिंह घुम्मन, अजायब सिंह, त्रिलोचन सिंह तोची, दलजीत सिंह, मनोहर सिंह मीते, सुरजीत सिंह चीते, सुखविंदर सिंह निक्कू, बलबीर सिंह, गुरकरण सिंह, प्रीतपाल सिंह, गुरप्रीत सिंह, जगजीत सिंह, मनमीत सिंह और हरविंदर सिंह सहित कई सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई।
आयोजकों ने बताया कि इस प्रकार के कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को सिख इतिहास, संस्कृति और परंपराओं से जोड़ना है। गुरुद्वारा कमेटी ने आश्वासन दिया कि भविष्य में भी धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों का आयोजन जारी रखा जाएगा, ताकि बच्चों को अपनी विरासत को समझने और अपनाने का अवसर मिल सके।



