
जमशेदपुर .
आगामी 22 और 23 मई 2026 को “पहाड़ एवं नदी पर राष्ट्रीय सम्मेलन” का आयोजन होने जा रहा है। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारत के पहाड़ों और नदियों के संरक्षण, संवर्धन और सुरक्षा के लिए एक मजबूत विधिक ढांचा तैयार करना है। इसी कड़ी में, आज दिनांक 19 मई 2026 को सम्मेलन के संरक्षक और जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय एवं सम्मेलन के संयोजक दिनेश मिश्र द्वारा संयुक्त रूप से “भारतीय पर्वत संरक्षण, संरक्षण एवं संवर्धन विधेयक, 2026” का प्रारूप सार्वजनिक कर दिया गया है। इस ड्राफ्ट को सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले सभी प्रतिनिधियों को अध्ययन और सुझावों के लिए भेजा जा रहा है।
पर्यावरण संरक्षण के लिए नया कानूनी ढांचा
इस प्रस्तावित विधेयक का मुख्य उद्देश्य भारत के संवेदनशील पर्वतीय पारिस्थितिक तंत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 48ए और 51ए(ग) के तहत पर्यावरण की रक्षा के नागरिकों और राज्य के कर्तव्यों को ध्यान में रखते हुए इस कानून का मसौदा तैयार किया गया है। यह विधेयक पूरे भारत में प्रभावी होगा। इसके दायरे में हिमालय, पश्चिमी घाट, अरावली, विंध्य और सतपुड़ा जैसी प्रमुख पर्वत श्रृंखलाएं आएंगी, जो वर्तमान में अनियंत्रित निर्माण, खनन और अत्यधिक पर्यटन के खतरों का सामना कर रही हैं। विधेयक के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक ‘राष्ट्रीय पर्वत संरक्षण प्राधिकरण’ के गठन का भी प्रावधान है।
मुख्य संरक्षण क्षेत्रों में भारी पाबंदियां
विधेयक के प्रारूप में पर्वतीय क्षेत्रों को तीन श्रेणियों—मुख्य संरक्षण क्षेत्र, विनियमित बफर क्षेत्र, और सतत उपयोग क्षेत्र में वर्गीकृत किया गया है। मुख्य संरक्षण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर खनन, वनों की कटाई, बड़े बांधों का निर्माण और खतरनाक कचरे के निपटान पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा। इसके अलावा, ऊंचाई वाले क्षेत्रों (3500 मीटर से ऊपर) में सड़क निर्माण और व्यावसायिक रूप से 20 कमरों से बड़े होटलों के निर्माण पर रोक लगाने का प्रस्ताव है।
स्थानीय आदिवासियों के अधिकार और सख्त सजा का प्रावधान
इस कानून में स्थानीय आदिवासियों और पारंपरिक वनवासियों के अधिकारों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। वनाधिकार अधिनियम, 2006 के तहत उनके पारंपरिक अधिकार और ज्ञान सुरक्षित रहेंगे। नियमों का उल्लंघन करने वालों के लिए बेहद कड़े दंड तय किए गए हैं। अवैध गतिविधियों में लिप्त पाए जाने पर 5 वर्ष तक की जेल और 10 लाख से लेकर 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
विधेयक को अंतिम रूप देकर भारत सरकार को अधिनियमित करने के लिए भेजा जाएगा। आयोजन समिति ने अपील की है कि जो प्रबुद्ध नागरिक किसी कारणवश सम्मेलन में शामिल नहीं हो पा रहे हैं, वे भी इस ईमेल या सार्वजनिक मंचों के माध्यम से अपने महत्वपूर्ण सुझाव भेज सकते हैं।


