
देवघर, 11 जून: झारखंड की सांस्कृतिक राजधानी देवघर में हिंदी साहित्य जगत के लब्ध प्रतिष्ठित दिवंगत कवि रामशंकर मिश्र ‘पंकज’ की यादों और उनकी अमर रचनाओं को एक बार फिर जीवंत किया गया है। स्थानीय श्यामा निवास में आयोजित एक गरिमामयी समारोह में युवा कवि हिमांशु झा द्वारा संकलित गीत संग्रह ‘मुझको अभी जीना है’ का भव्य लोकार्पण किया गया।

रामशंकर मिश्र ‘पंकज’ को हिमांशु झा ने किया पुनर्जीवित
इस लोकार्पण समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री राज पलिबार ने संकलनकर्ता हिमांशु झा के प्रयासों की जमकर सराहना की। राज पलिबार ने कहा कि आज के दौर में जब लोग रामशंकर मिश्र ‘पंकज’ जैसे महान साहित्यकारों को धीरे-धीरे भूलते जा रहे हैं, ऐसे समय में हिमांशु झा ने उनकी कालजयी रचनाओं को एक पुस्तक के रूप में पिरोकर दिवंगत कविवर को समाज के बीच पुनः जीवित करने का सराहनीय काम किया है। उन्होंने लेखक को इस भगीरथ प्रयास के लिए साधुवाद दिया।
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साहित्यकार निस्वार्थ भाव से करते हैं समाज का निर्माण
कार्यक्रम के मुख्य लोकार्पक और तक्षशिला विद्यापीठ के प्रबंध निदेशक (MD) अशोकानंद झा ने साहित्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि साहित्यकार अपनी रचनाएं पूरी तरह निःस्वार्थ भाव से समाज को समर्पित करते हैं। ऐसे निश्छल साहित्यकारों को वास्तव में साधु की संज्ञा दी जा सकती है। अशोकानंद झा ने युवा कवि हिमांशु झा की हौसलाअफजाई करते हुए उन्हें भविष्य में भी निरंतर लेखन कार्य जारी रखने के लिए प्रेरित किया और अपने स्तर से हर संभव मदद का भरोसा दिलाया।
समारोह में जुटे देवघर के दिग्गज साहित्यकार और प्रबुद्ध जन
इस ऐतिहासिक साहित्यिक समागम में क्षेत्र के कई गणमान्य लोग, बुद्धिजीवी और साहित्यकार मौजूद रहे। कार्यक्रम में मुख्य रूप से विश्वनाथ झा, डॉ. शंकर नाथ झा, उमाशंकर राव उरेन्दू, अमरनाथ झा पंकज, प्रो. रामनंदन सिंह, सर्वेश्वर दत्त द्वारी, योगेंद्र झा, निर्मल झा मंटू, विनय कृष्ण झा, रविशंकर साह, संजय मिश्र, अरुणानंद झा, चंद्र शेखर खवाड़े, डॉ. शंकर मोहन झा, अधिवक्ता शेखर झा, वार्ड पार्षद शैलजा देवी एवं वरिष्ठ पत्रकार शम्भू सहाय उपस्थित थे।
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कार्यक्रम का सफल और शानदार संचालन प्रसिद्ध उद्घोषक रामसेवक सिंह गुंजन ने किया। वहीं, पुस्तक के रचयिता और संकलनकर्ता हिमांशु झा ने कार्यक्रम में आए सभी अतिथियों का माल्यार्पण और अंगवस्त्र देकर भावभीना स्वागत किया।


