जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा क्षेत्र के लिए विकास का एक नया और ऐतिहासिक अध्याय शुरू होने जा रहा है। जमशेदपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद श्री बिद्युत बरण महतो के अथक प्रयासों से सुवर्णरेखा नदी के बामडोल घाट पर बहुप्रतीक्षित पुल निर्माण परियोजना अब अपने अंतिम और निर्णायक चरण में पहुँच गई है। यह पुल न केवल झारखंड और ओडिशा के बीच सीधा संपर्क स्थापित करेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
सांसद बिद्युत बरण महतो की पहल लाई रंग
स्थानीय लोगों की इस दशकों पुरानी मांग को सांसद श्री महतो ने पिछले लोकसभा सत्र के दौरान प्रमुखता से उठाया था। उन्होंने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर बामडोल घाट पर पुल निर्माण की आवश्यकता और इसके दूरगामी फायदों से उन्हें अवगत कराया था। सांसद ने स्पष्ट किया था कि यह पुल आवागमन के साथ-साथ व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाओं के लिए संजीवनी का काम करेगा।
नितिन गडकरी का आश्वासन और तत्परता
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस प्रस्ताव पर बेहद सकारात्मक रुख दिखाते हुए आश्वासन दिया था कि यदि झारखंड सरकार विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) बनाकर भेजती है, तो केंद्र सरकार इसे जल्द से जल्द स्वीकृति प्रदान करेगी। इस आश्वासन के बाद झारखंड सरकार के पथ निर्माण विभाग ने तुरंत एक्शन लेते हुए एक अधिकृत एजेंसी से योजनास्थल का विस्तृत भौगोलिक और तकनीकी सर्वेक्षण (Survey) कराया।
162 करोड़ की लागत और 8.460 किलोमीटर लंबा पुल
सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर हाई लेवल प्री-स्ट्रेस्ड कंक्रीट (H.L. PSC) ब्रिज का डीपीआर तैयार कर लिया गया है।
पुल की कुल लंबाई: लगभग 8.460 किलोमीटर
अनुमानित लागत: लगभग 162.14 करोड़ रुपये
सांसद महतो ने इस प्रक्रिया को और तेज करने के लिए झारखंड के पथ निर्माण विभाग के प्रधान सचिव से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की, जिसके परिणामस्वरूप विभाग ने सभी औपचारिकताएं पूरी कर पुल निर्माण का प्रस्ताव (DPR के साथ) केंद्र सरकार को प्रेषित कर दिया है।
बहरागोड़ा के लिए साबित होगा ‘गेम चेंजर’
इस बड़ी उपलब्धि पर संतोष व्यक्त करते हुए सांसद श्री महतो ने कहा कि यह परियोजना बहरागोड़ा और आसपास के ग्रामीण इलाकों के लिए एक ‘गेम चेंजर’ साबित होगी। उन्होंने उम्मीद जताई है कि आगामी मानसून सत्र से पहले इस योजना को केंद्र सरकार से अंतिम मंजूरी मिल जाएगी और निर्माण कार्य जल्द शुरू होगा।
इस पुल के बनने से झारखंड और ओडिशा के बीच सुरक्षित और सुगम यातायात सुनिश्चित होगा। इससे न सिर्फ व्यापारिक गतिविधियों में उछाल आएगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, जो क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को एक नई ऊँचाई पर ले जाएंगे।



