
जमशेदपुर: संस्कृति मंत्रालय (भारत सरकार), साहित्य अकादेमी और एलबीएसएम (LBSM) कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में महाविद्यालय के बहुउद्देश्यीय भवन में एक भव्य पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इस ज्ञानवर्धक कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन कोल्हान विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. रंजीत कुमार कर्ण ने किया।
कार्यक्रम की शुरुआत में महाविद्यालय के प्राचार्य और मैथिली के जाने-माने साहित्यकार डॉ. अशोक कुमार झा ‘अविचल’ ने उद्घाटनकर्ता और अन्य अतिथियों का शॉल ओढ़ाकर गर्मजोशी से स्वागत किया।
पुस्तक प्रदर्शनी ज्ञान के विकास में सहयोगी: डॉ. अशोक कुमार झा
अपने स्वागत वक्तव्य में प्राचार्य डॉ. अशोक कुमार झा ने कहा कि यह आयोजन छात्र-छात्राओं को सीधे तौर पर पुस्तकों से जोड़ने का एक विशिष्ट प्रयास है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि ऐसी प्रदर्शनियां ज्ञान के विकास और बौद्धिक क्षमता बढ़ाने में अत्यधिक सहयोगी सिद्ध होती हैं।
डॉ. झा ने इस सफल आयोजन के लिए संस्कृति मंत्रालय, साहित्य अकादेमी के सचिव डॉ. गुलाटी और क्षेत्रीय उपसचिव देवेंद्र कुमार ‘देवेश’ के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि भविष्य में कॉलेज में बृहद स्तर पर एक बहुभाषीय कवि-गोष्ठी का आयोजन किया जाएगा।
विज्ञान को भी साहित्य की तरह रुचिकर बनाने की जरूरत: डॉ. रंजीत कुमार कर्ण
उद्घाटनकर्ता और कोल्हान विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. रंजीत कुमार कर्ण ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने कहा:
“किताबें हमारे ज्ञान को विस्तृत करती हैं और मस्तिष्क को एक्टिवेट करती हैं। मोबाइल पर रील वगैरह देखने से मस्तिष्क का वास्तविक विकास नहीं होता। किताबों को हम केवल पढ़ते नहीं हैं, बल्कि उनके साथ जीते भी हैं।”
डॉ. कर्ण ने यह भी सुझाव दिया कि विज्ञान को भी साहित्य की तरह ही रुचिकर बनाने की कोशिश होनी चाहिए और पुस्तकालयों में विज्ञान की पर्याप्त और रोचक पुस्तकें उपलब्ध होनी चाहिए।
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डॉ. संतोष कुमार की पुस्तक ‘भारतीय ज्ञान प्रणाली’ का विमोचन
इस महत्वपूर्ण अवसर पर कोल्हान विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. रंजीत कुमार कर्ण के कर-कमलों द्वारा डॉ. संतोष कुमार द्वारा लिखित पुस्तक ‘भारतीय ज्ञान प्रणाली’ (एन.ई.पी. सिलेबस आधारित वी.ए.सी.-1) का विमोचन किया गया।
रजिस्ट्रार महोदय ने भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसी पुस्तकों को रेफरेंस के रूप में सिलेबस में जरूर जोड़ा जाना चाहिए। गौरतलब है कि डॉ. संतोष कुमार अब तक एन.ई.पी. (NEP) सिलेबस पर आधारित 30 पुस्तकों का लेखन पूरा कर चुके हैं।
प्रदर्शनी के मुख्य आकर्षण और उपस्थिति
पुस्तकों की बिक्री: इस एक दिवसीय आयोजन में हिन्दी, मैथिली, संताली, बांग्ला और अंग्रेजी आदि भाषाओं की लगभग 20,000 रुपये मूल्य की पुस्तकें बिकीं।
विद्यार्थियों का उत्साह: सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक कॉलेज के 700 से ज्यादा विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ प्रदर्शनी में हिस्सा लिया।
किताबों की भेंट: मैथिली-बांग्ला के साहित्यकार अमरनाथ झा ने अपने द्वारा संग्रहित और बांग्ला में अनुदित ‘विद्यापति गीत रत्नाकर’ और ‘मैथिली कथा शताब्दी संचयन’ एलबीएसएम कॉलेज की लाइब्रेरी को भेंट स्वरूप दी।
इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति: कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. विनय कुमार गुप्ता ने किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से घाटशिला कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आर.के. चौधरी, कोल्हान विश्वविद्यालय के उड़िया विभाग के अध्यक्ष डॉ. बालकृष्ण बेहरा, मैथिली की कवयित्री नूतन झा, मगध सम्राट हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. ज्योति सिंह, साहित्य अकादेमी के सायंतन घोष और सनत बोस मौजूद रहे।
इसके अलावा श्री ललन चौधरी, श्री मोहन ठाकुर, डॉ. मौसमी पॉल, डॉ. सुस्मिता धारा, डॉ. विजय प्रकाश, डॉ. अजय कुमार वर्मा, प्रो. पुरुषोत्तम प्रसाद, प्रो. संतोष कुमार राम, डॉ. दीपंजय श्रीवास्तव, प्रो. अरविंद पंडित, प्रो. रितु, डॉ. शबनम परवीन, डॉ. प्रशांत, प्रो. सलोनी रंजने, डॉ. सुधीर कुमार, प्रो. प्रमिला किस्कू, प्रो. शिप्रा बोयपाई, प्रो. बाबूराम सोरेन, हरिहर टुडू और रामप्रवेश यादव समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित थे



