जमशेदपुर ।मानगो में रविवार को नगर स्तरीय ‘विराट हिंदू सम्मेलन’ का अत्यंत भव्य और विशाल आयोजन किया गया। इस धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम में क्षेत्र के हजारों लोगों ने पूरे उत्साह और असीम श्रद्धा के साथ भाग लिया। सम्मेलन के दौरान पूरा मानगो क्षेत्र भक्ति, उल्लास और जयकारों से ओत-प्रोत रहा। इस महासम्मेलन का मुख्य उद्देश्य हिंदू समाज को एकजुट करना और अपनी सनातन संस्कृति व परंपराओं के प्रति लोगों को जागरूक करना था।
कला-संस्कृति का अनूठा संगम, ‘लव जिहाद’ पर नाटक का हुआ मंचन
सम्मेलन के दौरान धार्मिक विचारों के साथ-साथ कला और संस्कृति का भी अनूठा संगम देखने को मिला। इस अवसर पर समाज में जागरूकता लाने के उद्देश्य से ‘लव जिहाद’ जैसे ज्वलंत और संवेदनशील विषय पर एक प्रभावशाली नाटक का भी मंचन किया गया। कलाकारों की इस जीवंत प्रस्तुति ने वहां उपस्थित हजारों दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचा और उन्हें समाज की वर्तमान चुनौतियों पर सोचने के लिए प्रेरित किया।
जाति-भेद भुलाकर एकजुट हो हिंदू समाज: सत्य प्रकाश जी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के विभाग प्रचारक सत्य प्रकाश जी ने हिंदू समाज की एकता और अखंडता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि हिंदुओं को अपने सभी आपसी भेदभाव और मतभेदों को भुलाकर एक साथ मिलजुल कर रहना चाहिए। हमें ‘हिंदुस्तान, हिंदी और हिंदू’ होने पर गर्व करना चाहिए। उन्होंने चेताते हुए कहा कि सनातन धर्म को जातियों में बांटकर कमजोर करने का गहरा कुप्रयास किया गया है, लेकिन अब हमारा समाज पूरी तरह से जागरूक हो चुका है। अब समय आ गया है कि सभी एकजुट होकर राष्ट्र हित और धर्म रक्षा के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करें।
बच्चों को दें धार्मिक और सांस्कृतिक शिक्षा: महंत धर्मदास महाराज
सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में अयोध्या हनुमानगढ़ी के परम पूज्य महंत धर्मदास महाराज जी ने विशेष रूप से शिरकत की। उन्होंने उपस्थित विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए हिंदू धर्म की महान संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं के संरक्षण पर जोर दिया। महाराज जी ने कहा कि हिंदू धर्म पूरी तरह से प्रकृति के प्रति आस्था रखने वाला और उसका सम्मान करने वाला धर्म है। हमारे दैनिक जीवन में की जाने वाली तुलसी पूजा जैसी प्राचीन परंपराएं इसका जीता-जागता उदाहरण हैं। उन्होंने सभी अभिभावकों से पुरजोर अपील की कि वे अपने बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ धार्मिक और सांस्कृतिक शिक्षा (संस्कार) भी अवश्य दें, ताकि वे अपनी जड़ों से जुड़े रहें।
2000 श्रद्धालुओं ने एक साथ किया समरसता भोजन
इस विराट हिंदू सम्मेलन का एक मुख्य और सकारात्मक आकर्षण ‘समरसता भोजन’ रहा। समाज से ऊंच-नीच और जाति-भेद की भावना को पूरी तरह से मिटाते हुए लगभग 2000 लोगों ने एक साथ पंगत में बैठकर समरसता भोजन ग्रहण किया, जो समाज में समानता का एक बेहद मजबूत संदेश था। इस विशाल और ऐतिहासिक आयोजन को सफल बनाने में संचालन समिति के अध्यक्ष राजेश जी, सचिव अमलेश जी, संरक्षक जीवन जी, संतोष जी, करण जी, सतीश जी सहित सैकड़ों समर्पित कार्यकर्ताओं की अहम और सक्रिय भूमिका रही।





