जमशेदपुर । उल्दा गालूडीह स्थित माता वैष्णो देवी धाम में 18 से 21 अप्रैल 2026 तक भव्य चार दिवसीय धार्मिक महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान क्षेत्र पूरी तरह भक्ति, आस्था और उत्साह के रंग में रंग जाएगा। कार्यक्रम में प्रवचन, भजन-कीर्तन, पूजा-अर्चना और महाभंडारा जैसे कई धार्मिक आयोजन होंगे।
पहले दिन निकलेगी भव्य कलश यात्रा
18 अप्रैल (शनिवार) को सुबह 8 बजे हाई स्कूल गालूडीह से भव्य कलश यात्रा निकाली जाएगी, जो मंदिर परिसर तक पहुंचेगी। इस यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
गीता प्रवचन और भक्ति कार्यक्रम
18, 19 और 20 अप्रैल को प्रतिदिन शाम 5 बजे से 8 बजे तक स्वामी हृदयानंद जी महाराज के मुखारविंद से गीता सार प्रवचन एवं पाठ किया जाएगा। यह सत्र श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक ज्ञान का विशेष अवसर होगा।
माता की चौकी में गूंजेंगे भक्ति गीत
20 अप्रैल (सोमवार) को रात 8 बजे से भव्य “माता की चौकी” का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान प्रसिद्ध भजन गायक नीटू चंचल अपनी मधुर भक्ति प्रस्तुतियों से माहौल को भक्तिमय बनाएंगे।
प्राण-प्रतिष्ठा और महाभंडारा
21 अप्रैल (मंगलवार) को सुबह 8 बजे से प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम शुरू होगा, जो 10 बजे तक संपन्न होगा। इसके बाद दोपहर 1 बजे से भव्य महाभंडारा आयोजित किया जाएगा, जिसमें सभी श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद की व्यवस्था रहेगी।
लाइव प्रसारण की व्यवस्था
इस पूरे धार्मिक महोत्सव का सीधा प्रसारण दिव्यलोक चैनल के माध्यम से किया जाएगा, जिससे दूर-दराज के श्रद्धालु भी इस आयोजन से जुड़ सकेंगे।
READ MORE :Jamshedpur News :ट्रेनों की लेटलतीफी पर भड़के MLA सरयू राय, रेलवे को दिया सीधा अल्टीमेटम!
आयोजन समिति की अहम भूमिका
इस महोत्सव का संचालन श्री राज किशोर साहू एवं श्रीमती किरण देवी के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। साथ ही समिति के सदस्य—राजेश गुप्ता, पूनम गुप्ता, महेंद्र यादव, रिंकू सिंह, संजय पाल, संतोष शेट्टी, अनु शेट्टी, पी.के. विश्वास, अजय दास सचदेवा, पवन गुप्ता, रवि शेखर सिंह, आशा सिंह सहित अन्य सदस्य आयोजन को सफल बनाने में जुटे हैं।
श्रद्धालुओं से शामिल होने की अपील
आयोजकों ने सभी श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर इस धार्मिक महोत्सव में भाग लें और माता रानी का आशीर्वाद प्राप्त करें।
आस्था और एकता का प्रतीक
यह चार दिवसीय महोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि सामाजिक एकता और भाईचारे का भी संदेश देगा।




