जमशेदपुर: लौहनगरी के गोलमुरी स्थित विद्यापति परिसर में मिथिला सांस्कृतिक परिषद द्वारा जानकी नवमी का भव्य आयोजन किया गया। इस उत्सव में मिथिला की संस्कृति, परंपरा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। पूरे परिसर को 2500 दीपों से प्रज्वलित कर जगमग किया गया, जिससे वातावरण दीपावली जैसा जीवंत हो उठा।
भक्तिमय शुरुआत और सामूहिक वंदना
कार्यक्रम का शुभारंभ पुनम झा और माला चौधरी के नेतृत्व में माता जानकी की विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुआ। जैसे ही उपस्थित महिलाओं ने सामूहिक स्वर में ‘भगवती वंदना’ का गान किया, पूरा परिसर भक्ति के रस में सराबोर हो गया। राम कथा और जानकी नवमी के महत्व पर आरुषि और किषृ मिश्रा ने अपनी शानदार प्रस्तुति दी, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम: मैथिली गीत और नुक्कड़ नाटक
मिथिला की पहचान उसके लोक गीतों में बसती है। नीलम झा के साथ अन्य महिलाओं ने पारंपरिक मैथिली गीतों की प्रस्तुति दी। वहीं, राधा और उनकी टीम ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से सामाजिक संदेश दिए। नृत्य की कमान सरिता चौधरी ने संभाली, जिनकी प्रस्तुति ने कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए। इस दौरान जानकी जी के जीवन पर आधारित एक क्विज प्रतियोगिता भी आयोजित की गई।
विशिष्ट अतिथियों का सम्मान
समारोह में सुधा गुप्ता, डीएसपी जैप अरुणा मिश्रा, रेवा चौधरी और पतंजलि योग संस्थान की सुधा झा ने सम्मानित अतिथि के रूप में शिरकत की। अतिथियों ने मिथिला की महिलाओं द्वारा अपनी संस्कृति को जीवित रखने के प्रयासों की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। कार्यक्रम का संचालन कवि श्री और पुष्पांजलि मिश्रा ने किया, जबकि स्वागत भाषण माला चौधरी ने दिया।
मिथिला कला का प्रदर्शन: अरीपन और कोहबर प्रतियोगिता
इस आयोजन की मुख्य विशेषता मिथिला की पारंपरिक कलाएं रहीं। कोहबर, अरीपन और मिथिला पेंटिंग की प्रतियोगिताओं ने नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम किया। परिषद के अध्यक्ष मोहन ठाकुर, महासचिव धर्मेश कुमार झा (लड्डू), कोषाध्यक्ष रंजीत कुमार झा और कार्यक्रम प्रभारी पंकज राय को अन्नपूर्णा झा एवं श्रीलता पाठक द्वारा सम्मानित किया गया।
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ऐतिहासिक सफलता और सामूहिक भोज
कार्यक्रम को सफल बनाने में पिंकी, रीता झा, निशा झा, सुनीला, मनिषा भास्कर, ममता झा, रुपम झा और निर्मल मिश्रा का विशेष योगदान रहा। अंत में विभा राय ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम का समापन सामूहिक भोज के साथ हुआ, जहाँ लोगों ने पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लिया। परिषद के सभी कार्यकारी सदस्यों के सहयोग से यह आयोजन ऐतिहासिक रूप से सफल रहा।




